जिले में चुनाव परिणाम तक खैरियत में हैं जंगली जीव जंतु
लाइसेंस धारकों के हथियार 18 दिसंबर तक हैं पुलिस पहरे में
हर साल सर्दियों में शिकारी जंगली जीव जंतुओं को उतार देते हैं मौत के घाट
घनश्याम ठाकुर
चैलचौक (मंडी)। चुनावों के मद्देनजर पुलिस पहरे में जमा हुई जिला के लाइसेंस धारकों की बंदूकें, पिस्टल और कारतूसों से इस बार की सर्दी में जंगली जानवरों को सुरक्षा मिली है। नियमों को ताक पर रखकर हर साल आजकल जंगलों में शाम को दीवाली के पटाखों की तरह बंदूक से निकली गोलियों की आवाजें सुनाई नहीं दे रही हैं। इस माहौल में चर्चा है कि जंगली जानवरों के लिए ऐसे चुनाव हर साल आएं तो इनकी प्रजातियों में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। हर साल पहाड़ी क्षेत्रों में बंदूकधारी सैकड़ों जंगली जानवरों और पक्षियों को मौत के घाट उतार देते हैं। जिनकी प्रजातियां हर साल कम होती जा रही हैं।
18 दिसंबर को चुनाव परिणाम तक हिमाचल में लाइसेंस धारकों की बंदूकें पुलिस पहरे में हैं। जिससे शिकार के शौकीनों को इस समय मायूसी का सामना करना पड़ रहा है। जंगली मुर्गों, कक्कड़, घोरड़, सुअर और अन्य जीव जंतुओं ने इस साल राहत की सांस ली है। मंडी जिले में सर्वाधिक शिकार जंगली मुर्गों का होता है। पड़ताल के मुताबिक अगर चुनाव नहीं होते तो इस समय तक शिकारियों ने जंगलों में हजारों मुर्गे मौत के घाट उतार दिए होते। मंडी जिला में जंजैहली घाटी, कमरूघाटी, करसोग वैली, बल्ह, सुंदरनगर, द्रंग समेत अनेक ऐसे इलाके हैं जहां हर साल शिकारी हजारों जंगली जीव जंतुओं को सर्दी के मौसम में मौत के घाट उतार देते हैं। थाना प्रभारी गोहर मनोज कुमार ने बताया कि चुनाव परिणाम तक अगर बिना लाइसेंस से कहीं कोई व्यक्ति हथियार लेकर पकड़ा गया तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।