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जीएसटी के विरोध में उतरे मंडी के व्यापारी, राष्ट्रव्यापी बंद को समर्थन

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मंडी। जीएसटी के कुछ प्रावधानों से असंतुष्ट होकर मंडी व्यापार मंडल ने भी मोर्चा खोल दिया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रव्यापी बंद का समर्थन करते हुए 30 जून को मंडी शहर के व्यापारिक एवं औद्योगिक संस्थानों को बंद रखने का एलान किया है। यह निर्णय व्यापार मंडल की बैठक में लिया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रधान अशोक कपूर ने की। व्यापार मंडल सचिव हरमीत सिंह बिट्टू ने कहा कि व्यापारी वर्ग जीएसटी को लागू किए जाने के विरोध में नहीं है, लेकिन जिस तरह व्यवस्था आनन फानन में लागू की जा रही है, उसे लेकर कारोबारियों में रोष है। बैठक में कारोबारियों में इकबाल सिंह, राजेश महिंद्रू, नितिन कपूर, भगवंत सिंह, सतीश गुप्ता, चेतन, आशुतोष, गौरव, सुखविंद्र, अशोक शर्मा, प्यारा सिंह और महेंद्र गुप्ता मौजूद रहे। हालांकि इस दौरान जरूरती उत्पादों की उपलब्धता रहेगी। मंडी जिले में करीब 9000 आबकारी एवं कराधान विभाग के पंजीकृत डीलर हैं।
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सजा का प्रावधान असंवैधानिक
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी में कोताही पर व्यापारी को सजा का प्रावधान पूर्णत: असंवैधानिक है। कर और जुर्माना लगाने का प्रावधान है। लेकिन, कारोबारियों को इस तरह सजा देने का प्रावधान उनपर मानसिक दबाव बढ़ाने से कम नहीं है। एक तरफ गलाकाट प्रतिस्पर्धा में वैसे ही कारोबार कठिन हो गया है, ऊपर से सजा का प्रावधान कारोबारी के मनोबल पर विपरीत असर डालेगा।
10 लाख तक ही छूट क्यों?
मंडी के कारोबारियों का तर्क है कि जीएसटी के तहत व्यापारियों को छूट के लिए टर्न ओवर की सीमा में अन्य राज्यों की तुलना में कहीं कम है। यहां सिर्फ 10 लाख की छूट क्यों दी गई है। जबकि कई राज्यों में 30 लाख तक की छूट का प्रावधान है। ऐसे में प्रदेश में छोटे तबके का कारोबारी भी जीएसटी के दायरे में आएगा और उसे भारी मुश्किल होगी।
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ई-वे बिल प्रणाली हो समाप्त
व्यापारी वर्ग की सरकार से मांग है कि ई-वे बिल प्रणाली को समाप्त किया जाए। एक माह में तीन रिटर्न के स्थान पर तीन माह में एक रिटर्न वाली व्यवस्था को पूर्ववत जारी रखा जाए। यदि सरकार जीएसटी को लागू करते समय व्यापारी वर्ग को विश्वास में ले तो व्यापारी वर्ग सरकार के प्रति सहयोग का रुख अपनाएगा अन्यथा व्यापारिक समुदाय को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष की राह अपनानी पडे़गी।
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