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सीएम के गृह क्षेत्र में स्कूलों के हाल बेहाल

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मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में स्कूलों के हाल बेहाल
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शिक्षक नहीं होने से बंद रहते हैं कशौड़ और थाच स्कूल
प्रतिनियुक्ति पर तैनात अध्यापक कभी कभार ले लेते हैं क्लास
अभिभावकों ने दी बच्चों को स्कूल से हटाने की चेतावनी
त्रिपुरारी सांख्यान
मंडी। प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नई-नई योजनाएं चलाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे कर रही है लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सीएम के गृह क्षेत्र सिराज की बालीचौकी तहसील के तहत ऐसे भी संस्थान हैं जो सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं। इनमें माध्यमिक पाठशाला कशौढ़ और प्राथमिक पाठशाला थाच में एक भी शिक्षक नहीं है। हां! कभी-कभार प्रतिनियुक्ति पर तैनात शिक्षक विद्यार्थियों की क्लास ले लेते हैं। कई बार तो इन स्कूलों पर ताले ही लटके रहते हैं। इस समय कसौढ़ स्कूल में एक शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर तैनात है, लेकिन वह भी कभी कभार ही स्कूल में पहुंच पाते हैं। वहीं, बच्चों की पढ़ाई नहीं होते देख क्षेत्र का एक पढ़ा-लिखा युवा जीवानंद यहां पर निशुल्क बच्चों को पढ़ा रहा है। इस स्कूल में करीब दो सालों से अध्यापक नहीं हैं। तब से लेकर आज तक यहां पर बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। यह शिक्षक अंग्रेजी और मैथ जैसे अहम विषयों को छोड़ कर बाकी सभी विषय बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उधर, थाच प्राइमरी स्कूल तो अधिकतर दिन बंद ही रहता है। यहां पर गांव की एक लड़की बच्चों को नि:स्वार्थ पढ़ा रही है। यहां पर भी कई सालों से अध्यापक नहीं है। उधर, उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों की कमी सरकार के ध्यान में है। प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि शीघ्र स्कूलों में अध्यापकों की कमी पूरी होगी और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चलेगी।
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घटती जा रही बच्चों की संख्या
कसौढ़ स्कूल के एसएमसी प्रधान किशन ने बताया कि इस स्कूल में कभी 60 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। शिक्षक नहीं होने और पढ़ाई नहीं होने के कारण बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इस समय इनकी संख्या तीस रह गई है। उधर, थाच स्कूल के प्रधान शुक्र राम ने बताया कि यहां पर भी अब 16 ही बच्चे शेष रह गए हैं। अभिभावकों चंद्र चूहड़ सिंह, टीकम राम, प्रेमा देवी और कसौढ़ स्कूल के अभिभावकों किशन चंद, नरोत्तम, उत्तम चंद, इंद्रा देवी, रेश्मा आदि ने सरकार और विभाग के प्रति भारी रोष जताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र नियमित अध्यापक नहीं मिले तो सभी अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में दाखिल करने को मजबूर होंगे।
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