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पहाड़ों में ओलावृष्टि,  नगदी फसलें तबाह

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- फोटो : अमर उजाला
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मंडी/गोहर (मंडी)। जिले के ऊपरी क्षेत्रों में ओलावृष्टि से नगदी फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में बारिश से गेहूं की फसल को संजीवनी मिली है। जिले के नाचन, सराज क्षेत्र में भयंकर ओलावृष्टि होने से किसानों-बागवानों की नगदी फसलें तबाह हो गई हैं। जबकि, मैदानी क्षेत्रों में बारिश से गेहूं की फसल की अच्छी पैदावार की आस लगाने वाले किसानों को राहत मिली है। शनिवार देर रात से जिले के मैदानी क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई थी। रातभर बारिश रुक-रुक होती रही। वहीं, रविवार दोपहर बाद हुई ओलावृष्टि से किसानों और बागवानों के चेहरे मुरझा गए हैं। कमरूघाटी, शिकारी देवी और पराशर की ऊंची पहाड़ियों ने देरशाम तक बर्फ की चादर ओढ़ ली है।
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कमरूघाटी में हुई इस साल की पहली ओलावृष्टि से कल्हणी, सरयाच, खुनास, छैण मैगल, बटहणी और आसपास के इलाकों में मटर की फसल को नुकसान पहुंचा है। पहली ओलावृष्टि किसानों बागवानों पर भारी पड़ी है। आजकल क्षेत्र में प्लम और आडू के बगीचों में फूल पड़ गया है। ओलावृष्टि से फूल झड़ गए हैं। रविवार दोपहर बाद हुई ओलावृष्टि से किसानों की मानो कमर टूट गई। हालांकि सेब बगीचों में अभी फ्लावरिंग के लिए एक माह का समय बचा हुआ है। लेकिन, ओलावृष्टि की दस्तक ने किसानों बागवानों की नींद उड़ा दी है। नाचन फल सब्जी उत्पादक संघ के उपाध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि क्षेत्र में ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। मौसम का मिजाज यही रहा तो किसानों बागवानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सिराज घाटी के अनेक स्थानों में भी ओलावृष्टि का समाचार है। कृषि विषयवाद विशेषज्ञ डा. खूब राम चौहान ने ओलावृष्टि होने की पुष्टि की है। किसानों दीवान चंद, दीपक कुमार, दीनानाथ, लीला प्रकाश, हेमराज, निहाल सिंह और मुरारी लाल ने बताया कि ओलावृष्टि होने से उनकी मटर की फसल को नुकसान हुआ है।
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