बलविंद्र सोढ़ी
सुंदरनगर(मंडी)।
नगर परिषद सुंदरनगर के लिए शहरवासियों से गृहकर वसूलना गले की फांस बन गया है। समय पर गृहकर न मिलने से आर्थिक संकट से जूझ रही नगर परिषद को विकास कार्यों को गति देना भी परेशानी का सबब बन के रह गया है। आर्थिक संकट को दूर करने के लिए अब नगर परिषद ने गृहकर वसूली को लेकर अभियान तेज करने का फैसला लिया है। इस स्तर पर सबसे पहले नगर परिषद ने करीब दो सौ डिफॉल्टरों की सूची तैयारी की है जिनके ऊपर 20 हजार से अधिक का गृहकर वर्षों से लंबित है।
डिफॉल्टरों से गृहकर वसूलने के लिए नगर परिषद ने बातचीत का का फैसला लिया है। अगर गृहकरदाता गृहकर एक मुश्त न दे पाए तो किस्तों में इससे निश्चित समयावधि में अदा किया जा सकेगा। अन्य छोटे गृहकर दाताओं से भी बकाया गृहकर वसूलने के लिए डोर-टू-डोर मुहिम चलाई जाएगी। नगर परिषद की ये कवायद बड़े और छोटे डिफॉल्टरों पर दबाव बनाने के लिए शुरू की है।
गौरतलब है कि नगर परिषद की गृहकर की राशि बढ़कर करीब 1.50 करोड़ पहुंच चुकी है। बार-बार नोटिस और बिल देने के बावजूद लोग इसे अदा करने में आनाकानी कर रहे हैं। हालांकि 2013 में जब सरकार ने नगर परिषद को राशन कार्ड बनाने की शक्तियां दी तो उस दौरान करीब बीस लाख की बकाया वसूल हुआ था। अब राशन कार्ड बनाने की शक्तियां वापस हो जाने के बाद अधिकतर लोगों ने गृहकर अदा करने से कनी काटनी शुरू कर दी। इसके कारण हर साल नगर परिषद गृहकर वसूलने का लक्ष्य हासिल नहीं कर पा रही है। बड़े डिफॉल्टरों से गृहकर वसूल न होने पर उनके खिलाफ कोर्ट में केस दायर करने पर भी नगर परिषद विचार कर रही है। इससे पहले वह हाउस में मामला रख विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके लिए प्रारूप तैयार किया जा रहा है। लेकिन इससे पहले नगर परिषद डिफाल्टरों को एक और मौका देना चाह रही है।
कार्रवाई हो रही शुरू: अशोक
कार्यकारी अधिकारी अशोक शर्मा ने कहा कि समय पर गृहकर न आने से विकास के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। गृहकर के रूप में जो राशि नगर परिषद के पास आती है वह विकास कार्यों पर ही खर्च की जाती है। अगर डिफॉल्टरों ने गृहकर जल्द अदा न किया को उनके खिलाफ कोर्ट में केस करने के साथ-साथ नाम सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा करने की कवायद शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।