मंडी। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के एक याचिकाकर्ता के हक में आए फैसले के बाद टेट मेरिट आधार पर नियुक्ति की आस लगाए बैठे सैकड़ों जेबीटी प्रशिक्षुओं को मायूसी ही हाथ लगी है। इन अभ्यर्थियों ने टेट मेरिट आधार पर नियुक्ति करने की मांग उठाई है। अभ्यर्थियों ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने फैसले में कहा कि टेट मेरिट के आधार पर जेबीटी की भर्ती तर्कसंगत नहीं है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राज्य सरकार टेट को आधार मानकर नियुक्तियां प्रदान कर सकती है। इसके लिए राज्य सरकारों को बाधित नहीं किया जा सकता है।
अभ्यर्थियों ने तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश में की गई हजारों प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियां जो कि टेट के आधार पर की गई हैं, इन्हें सुप्रीम कोर्ट ने उचित ठहराया है। लेकिन, हिमाचल में ट्रिब्यूनल कोर्ट ने आरएंडपी नियम को निरस्त करने का निर्णय लिया है। यह टेट मेरिट में आने वाले जेबीटी प्रशिक्षुओं के साथ अन्याय है। टेट उत्तीर्ण जेबीटी प्रशिक्षुओं तीर्थ राज, व्यास देव, ओम प्रकाश, देवेंद्र कुमार, तिलक राज, निर्मला कुमारी, वंदना कुमारी, ललित ठाकुर, उमेश कुमार, भावना कुमारी, राजेंद्र कुमार, संजय ठाकुर, रमेश कुमार ने कहा कि कर्मिक विभाग के प्रपत्र के अनुसार जो भी भर्ती की जाती है, वह आरएंडपी रूल्स के तहत ही की जाती है। इसके लिए अलग से कोई नए नियम बनाना तर्क संगत नहीं है। प्रदेश में वर्तमान में भरे जा रहे जेबीटी के 700 पदों को भरने की अधिसूचना छह माह पूर्व आरएंडपी नियम 2012 के अनुरूप निकाली गई थी। टेट मेरिट और जिलावार नियुक्तियां प्रदान करने की प्रक्रिया प्रदेशभर में पूरी कर ली गई हैं। जबकि, अब प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने एक जेबीटी याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुना कर टेट मेरिट आधार पर जेबीटी भर्ती पर रोक लगा दी है, जोकि न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल के फैसले से जेबीटी प्रशिक्षुओं में रोष व्याप्त है। उन्होंने प्रदेश सरकार और विभाग से टेट मेरिट के आधार पर नियुक्तियां करने की मांग उठाई है। प्रशिक्षुओं ने विभाग को चेताया है कि यदि उनकी मांग न मानी गई तो वह आंदोलन करने को विवश होंगे।