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बारिश का पानी पीने को मजबूर मधरवाण के बाशिंदे

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पधर (मंडी)। चौहारघाटी की ग्राम पंचायत लटराण के मधरवाण गांव के बाशिंदे गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। यहां सरकार की ओर से कोई भी पेयजल योजना नहीं बनाई गई है। ऐसे में ग्रामीण जमीन खोद कर बनाए गए गड्ढों में बारिश के रुके पानी से गुजारा कर रहे हैं। मवेशियों को भी इसी से पानी पिलाया जाता है। कोई भी पेयजल योजना न होने से स्थानीय ग्रामीणों में खासा रोष है। मधरवाण वार्ड के वार्ड सदस्य अमर सिंह ने कहा कि बीते माह धमच्यान पंचायत के थलटूखोड़ में आयोजित जनमंच में इस मामले को उद्योग मंत्री विक्रम सिंह और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उठाया था। अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। वार्ड सदस्य अमर सिंहं, कली राम, लाभ सिंह, टेक चंद, राजमियां, जोगिंद्र, कौल सिंह, साउंणी देवी, हाथी देवी, हिमी देवी, बंती देवी, साजी देवी, डागण देवी, कली देवी और मली देवी ने बताया कि मधरवाण गांव के लगभग तीस परिवारों की जमीन कुफरधार गांव में पड़ती है। जहां ग्रामीण लगभग चार माह के लिए अस्थायी शैड बना कर गुजर बसर करते हैं। लेकिन यहां पानी की कोई योजना नहीं है। इस कारण ग्रामीणों ने जमीन में खातरी बना रखी है। इसमें बारिश का पानी खाने पीने के प्रयोग में लाया जाता है। इसी पानी से ही पालतू मवेशियों की प्यास भी बुझाई जाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001-02 में यहां ग्रामीणों की मांग पर पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन पानी आज तक नहीं आया। पाइप जंग खा कर क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से पेयजल उपलब्ध करवाने की गुहार लगाई है।
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बनाई जाएगी योजना : सूरजमणि ठाकुर
कनिष्ठ अभियंता आईपीएच अनुभाग थलटूखोड़ सूरजमणि ठाकुर ने कहा कि लटराण पंचायत के मधरवाण गांव के कुछ लोग ऊपर धार के साथ लगती जमीन में रहते हैं। इन्होंने पानी की समस्या का मामला ध्यानार्थ लाया है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए विभाग ने लगभग 12 लाख का एस्टिमेट बना कर मंजूरी के लिए भेजा है। शीघ्र ही योजना तैयार कर ली जाएगी।
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