वन विभाग से क्लीयरेंस मिलने के बाद चिरलंबित संस्कृति देव सदन का कार्य आखिर शुरू कर दिया गया। प्रशासन ने आगामी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव से पहले सदन का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इससे रियासतों के दौर से मनाए जा रहे महोत्सव में सैकड़ों मील से छोटी काशी पहुंचने वाले देवी देवताओं के कारदारों और देवलुओं को छत मिलेगी। लगभग डेढ़ वर्ष पहले इसके लिए प्रशासन को सरकार की ओर से छह करोड़ रुपये की किस्त मिल गई थी। वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने के कारण कार्य रुका था। उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर की अध्यक्षता में विकास कार्यों को लेकर साप्ताहिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में उपायुक्त ने बताया कि कांगणी में निर्मित किए जा रहे संस्कृृति देव सदन के लिए वन विभाग ने अनापत्ति प्रमाणपत्र सौंपा। अब सदर का निर्माण शुरू कर दिया गया है। कहा कि आगामी शिवरात्रि महोत्सव से पहले देव सदन का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि शहर में पार्किंग की समस्या से निजात दिलाने के लिए स्थलों के चयन की प्रक्रिया जारी है। डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए सरकार को भेजी जाएगी। उन्होंने विभिन्न सड़कों तथा अन्य विकास योजनाओं से संबंधित लंबित एफसीए के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए। बैठक में परिधि गृह के नजदीक निर्मित की जाने वाली वाहन पार्किंग, तीन पंचायत भवनों के निर्माण के लिए जमीन तलाशने, सैण मुहल्ला की सड़क को शीघ्र पूर्ण करने पर विस्तार से चर्चा की। उपायुक्त ने मंडी शहर की नालियों की नियमित रूप से साफ-सफाई करने के लिए भी नगर परिषद के अधिकारी को निर्देश दिए। बैठक में 20 से भी अधिक मदों पर चर्चा की गई।