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मेडल पाकर चहके होनहार, बोले हम बनेंगे जीनियस

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fff - फोटो : अमर उजाला
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सुंदरनगर (मंडी)।
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डीएवी पब्लिक स्कूल सुंदरनगर में बुधवार को ‘अमर उजाला’ और बंसल क्लासेज कोटा की ओर से आयोजित जीनियस ब्रिगेड परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में डीएवी पब्लिक स्कूल, महावीर पब्लिक स्कूल, वर्धमान महावीर पब्लिक स्कूल, मंगलम पब्लिक स्कूल, स्प्रिंग फील्ड पब्लिक स्कूल, पैराडाइज पब्लिक स्कूल, एंजल पब्लिक स्कूल और विश्व भारती पब्लिक स्कूल के कक्षा आठ से 11 तक के करीब 700 विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। कैरियर काउंसलिंग से पूर्व जीनियस ब्रिगेड क्लास के तहत कक्षा आठ से लेकर 11 तक के विद्यार्थियों की एक घंटे की परीक्षा ली गई। एक घंटे की परीक्षा में विद्यार्थियों ने सामान्य ज्ञान, गणित और तर्क शक्ति पर आधारित प्रश्नों का ओएमआर सीट पर जवाब दे अपनी मेधा को आजमाया। परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों को बंसल कोचिंग क्लासेज ने मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। जिन्हें पाकर बच्चों में खुशी देखते ही बनती थी। बंसल क्सासेज के विशेषज्ञों ने अमर उजाला की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जीवन में कई ऐसे पड़ाव आते, जिनमें लिए गए फैसले ही हमारा भविष्य तय करते हैं। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि उन पड़ाव पर जो भी फैसला लिया जाए, वह सोच विचार कर विवेक के साथ लिया जाए। ऐसा ही एक पड़ाव है कैरियर चुनने का। अकसर इस पड़ाव पर हुई एक गलती पूरी जिंदगी को परेशानी दे जाती है। कॅरिअर का चुनाव आत्मविश्वास के साथ बेहतर मार्गदर्शन में किया जाए तो निश्चित ही सफलता कदम चूमेगी।

विशेषज्ञों से मिली जानकारी अहम : प्रधानाचार्य
डीएवी स्कूल के प्रधानाचार्य मोहित चुग ने कैरियर के बारे में बच्चों को विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी को उनके जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अगर सही समय में बच्चों को सही मार्गदर्शन मिले तो वह अपना लक्ष्य हासिल कर पाने में अधिक सक्षम होते हैं। उन्होंने कहा कि अमर उजाला बच्चों की ज्ञान की नींव को मजबूत करने का काम कर रहा है। इससे बच्चों को खुद आकलन करने का मौका मिल रहा है।
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विशेषज्ञों ने बताए सफलता के सूत्र
जीनियस ब्रिगेड परीक्षा के बाद बंसल क्लासेज कोटा के विशेषज्ञ शिक्षक शशांक गर्ग और हरजिंद्र सिंह ने कॅरिअर काउंसलिंग के जरिए सफलता के सूत्र बताये। शशांक गर्ग ने कहा कि हमारा जिस चीज में रुझान अधिक होता है, इसे सीखना उतना ही आसान रहता है। इसलिए जिंदगी में कुछ भी करो, उसे मस्ती के साथ करो। किसी खास विषय पर तनाव अपने दिमाग पर हावी नहीं होने देना चाहिए। वर्तमान में प्रतियोगिता का समय है। परीक्षाओं में ऑब्जेक्टिव प्रश्न आते हैं। इसलिए कक्षा छह या सात से ही तैयारी शुरू कर देना फायदेमंद रहता है। उन्होंने कहा कि अगर जीवन में सफल होना है तो अपने स्कूल पर, शिक्षक पर और सबसे अधिक अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए कि मैं इस मंजिल को पा सकता हूं। हरजिंद्र सिंह ने कहा कि बच्चे पढ़ाई करना सबसे कम पसंद करते हैं। इसलिए उन्हें अपने शौक को सफलता में बदलना चाहिए। हमें सफल व्यक्तियों द्वारा किये जाने वाला कार्य बहुत आसान लगता है, लेकिन जब हम गहनता से उनकी दिनचर्या का अध्ययन करेंगे तो वह बहुत कठिन होती है। प्रयास को सफलता तक पहुंचाने के लिए धैर्य की जरूरत पड़ती है। इसलिए यदि पढ़ाई को एक शौक के तौर पर लिया जाए तो इसमें भी सफल होना आसान है।
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