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एचपीसीए को 18 सालों के बाद अचानक क्यों आई पड्डल की याद

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स्टोरी-02
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पड्डल की देखरेख एचपीसीए को
सौंपे जाने की कवायद का विरोध
खेल संघों ने ऊर्जा मंत्री, उपायुक्त को सौंपी शिकायत, कहा-किया जाए पुनर्विचार
पड्डल में होती हैं सभी खेलें, क्रिकेट संघ का हस्तक्षेप मंजूर नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। ऐतिहासिक पड्डल मैदान की देखरेख की जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ को सौंपे जाने की कवायद ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। सुंदरनगर के साथ-साथ जिला मुख्यालय में भी खेल संघों ने इस पर जोरदार विरोध जताया है। साथ ही ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा और उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर को रोष स्वरूप शिकायत भी सौंपी है। खेल प्रेमियों में लीला विलास, जगदीश, दलीप ठाकुर, अशोक भुट्टो, सतींद्र कुमार, टेक चंद, कैलाश मित्र तिवारी, सुनील कुमार, परमानंद सैनी, राजेंद्र गुप्ता, राजेंद्र सिंह राजा, हिंद नरेश वैद्य, दिनेश कुमार, संतोष कपूर, राजीव शर्मा, हरीश कपूर ने कहा कि यह मैदान सभी खेलों के लिए उपलब्ध है। उसमें क्रिकेट संघ का कोई हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा। 18 वर्षों के उपरांत क्रिकेट संघ को पड्डल मैदान की याद कैसे याद आई, जबकि इस अंतराल में इसके साथ ऐसा सौतेला व्यवहार किया गया कि एक भी मैच इस मैदान पर नहीं होने दिया गया। इसके लिए जिम्मेदार कौन था इसकी भी जांच अवश्य होनी चाहिए। सदस्यों ने यह प्रश्न भी उठाया है कि पड्डल मैदान हर साल प्रशासन को तीन करोड़ की आमदनी जुटा रहा है उसकी देख-रेख के लिए क्रिकेट संघ की ओर क्यों देखना पड़ रहा है इसके लिए प्रशासन को जनता के प्रति जवाब देना चाहिए।
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