करसोग (मंडी)। करसोग के दूरदराज गांव कतांडा के नगेल्डि स्थित एक पेड़ आज भी धार्मिक आस्था का प्रतीक बना हुआ है। लोगों की आस्था है कि यहां पर गाड़ियों की नंबर प्लेट या टूटे फूटे पुर्जे चढ़ाने से हादसों की संभावना कम हो जाती है। 21वीं सदी के दौर में भी इस पेड़ के सामने आने पर सभी वाहन चालक शीश झुकाते हैं और यहां पर गाड़ियों की नंबर प्लेट या टूटे हुए सामान को श्रद्धा से चढ़ाते हैं। पेड़ के पास शीश नवाने गाड़ियों का टूटा फूटा सामान चढ़ाने और यहां पर पूजा अर्चना करने के बाद सुरक्षित सफर की गारंटी मिलती है। यह पेड़ करसोग से लगभग 30 किलोमीटर दूर करसोग छतरी मार्ग के कतांडा से थोड़ी दूर नगेल्डि पर स्थित है।
पेड़ पर है देवता वनशिरा का निवास
मान्यता है कि इस पेड़ पर देवता वनशिरा का निवास है। यह देवता जंगलों और सड़क मार्ग की रात्रि को पूरी तरह सुरक्षा करते हैं। वनशिरा देवता के कारदार सूरत राम और राजेंद्र कुमार ने बताया की दयार के पेड़ में वनशिरा देवता का वास है। यहां वाहन चालक लोहे के समान के कल पुर्जे चढ़ाते हैं, जिससे यात्रियों की यात्रा सफल होती है और गाड़ी के नुकसान का भय भी नहीं रहता तथा सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचने की कामना करते हैं। यहां से गुजरने वाला हर वाहन चालक यहां पर पूजा अर्चना किए बगैर नहीं गुजरता है।
देवता ने मंदिर बनाने से किया इनकार
देवता वनशिरा के कारदारों ने यहां मंदिर बनाने की सोची थी, लेकिन देवता ने पूछ के दौरान मंदिर बनाने से इनकार कर दिया। जबकि, यहां पर साथ ही शिकारी माता का मंदिर बनाया गया है। यह ग्रामीणों के साथ ही अन्य लोगों की भी आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि देवता के आदेश के बिना यहां पर मंदिर का निर्माण नहीं किया जा सकता है।