रिवालसर (मंडी)। अब ग्रामीण परिवेश में भी विद्यार्थियों के लिए मोबाइल जुनून बन चुका है। सस्ती और मुफ्त इंटरनेट सेवा की लत छात्रों को स्कूल टाइम में भी गिरफ्त में लिए हुए है। प्रतिबंध के बावजूद विद्यार्थी मोबाइल को किताबों की तरह स्कूल में लाने में लगे हैं। ऐसे विद्यार्थी स्कूल में पढ़ाई का माहौल खराब तो कर ही रहे हैं, साथ ही नियमों की अनदेखी का बीज भी अन्य विद्यार्थियों में बो रहे हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में वीरवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला। शिकायतों के बाद स्कूल मुखिया ने जब परिसर में अचानक मोबाइल पकड़ो अभियान शुरू किया तो सात के पास से स्मार्ट फोन पकड़े गए। स्कूल प्रबंधन ने मोबाइल जब्त कर लिए हैं। वहीं प्रबंधन का कहना है कि मोबाइल अभिभावकों को ही लौटाए जाएंगे।
शिक्षकों पर कौन कसे शिकंजा
स्कूल में मोबाइल लाने वाले विद्यार्थियों पर नकेल कसना बिल्कुल सही है लेकिन, सवाल उठ रहा है कि कक्षाओं में मोबाइल ले जाने वाले अध्यापकों पर कौन शिकंजा कसे। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि कोई भी शिक्षक कक्षाओं में फोन लेकर जाते ही नहीं। अगर कोई जाता भी है तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई होती है। लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि अब तक किसी भी शिक्षक का फोन जब्त नहीं हुआ है।
एकाग्रता और याद करने की क्षमता होती है क्षीण
एक पत्रिका में प्रकाशित आर्टिकल में डॉ. मनमोहन कुमार बताते हैं कि छात्र जीवन में मोबाइल का अधिक प्रयोग करने से याद करने की क्षमता कम होती है। मोबाइल पास में होने से ध्यान फोन पर आने वाले मैसेज या सोशल मीडिया की अपडेट आदि पर ही रहता है। जिससे बारंबार चीजें याद करने से भी याद नहीं होती। ग्रुप और व्यक्ति डिस्टरेक्शन भी फोन से होती है। बीप या वाइब्रेटर जब कोई मैसेज आने या अपडेट से आवाज करता है तो न केवल व्यक्तिगत बल्कि ग्रुप का ध्यान भी आवाज की तरफ आकर्षित होता है। जो एकाग्रता में कमी लाती है।
अभिभावकों को वापस करेंगे मोबाइल : प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य बंशी लाल ने कहा कि स्कूल शिक्षा बोर्ड के नियमानुसार स्कूल में मोबाइल फोन लाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके चलते स्कूल में विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि टीचर भी मोबाइल का प्रयोग नहीं कर सकते। वीरवार को स्कूल प्रशासन ने छात्रों की तलाशी लेने का निर्णय लिया और सात छात्रों के पास से मोबाइल फोन जब्त किए। अब पकड़े गए छात्रों के मोबाइल फोन अभिभावकों के सामने वापस किए जाएंगे। जिसके लिए स्कूल प्रशासन द्वारा छात्रों को आदेश जारी कर दिए हैं।