बजट की कमी से नए पंचायत प्रोजेक्ट लटके, दूसरी बैठक में नहीं हुई थी बजट पर चर्चा
वार्डों में 16 लाख के बजाय नाममात्र के फंड की संभावना, अगली बैठक भी दो माह के बाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। देश की आधी आबादी गांवों में बसती है लेकिन मंडी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देने वाली जिला परिषद की योजनाएं बजट के अभाव में ठप पड़ गई हैं। चुनाव के बाद जिला परिषद सदस्यों को उम्मीद थी कि वे अपनी पंचायतों की नई विकास प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारेंगे लेकिन 16वें वित्त आयोग की किस्त जारी न होने से सदस्य बजट का इंतजार कर रहे हैं।
जिला परिषद की पहली बैठक में बजट को लेकर कोई ठोस चर्चा नहीं हो सकी। अगली बैठक भी करीब दो महीने की देरी से प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार पहले प्रत्येक वार्ड को विकास कार्यों के लिए करीब 16 लाख रुपये की किस्त मिलती थ लेकिन इस बार इसमें भारी कटौती की संभावना है। मंडी जिले के 36 जिला परिषद वार्डों में कई वार्ड ऐसे हैं, जिनके अंतर्गत 21 पंचायतें तक आती हैं। ऐसे में कम राशि मिलने पर एक पंचायत के हिस्से में एक लाख रुपये भी नहीं आएंगे। इससे पंचायत स्तर पर नए निर्माण और रखरखाव के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
पंचायतों में नए कामों का इंतजार
ग्रामीण नए विकास कार्यों की आस लगाए बैठे हैं। किस्त में देरी और बजट कटौती की संभावना से जिला परिषद सदस्य भी असमंजस में हैं।
पंचायतों में नए कामों के लिए ग्रामीण इंतजार कर रहे हैं। किस्त जारी होने में देरी से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। -परस राम, सदस्य, जिला परिषद, सदयाणा वार्ड
अधिक पंचायतों वाले बड़े वार्डों में कम बजट ऊंट के मुंह में जीरा साबित होगा। सरकार को तुरंत राहत देनी चाहिए। -रोशन लाल, सदस्य, जिला परिषद, डैहर वार्ड
बजट न मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताएं प्रभावित हुई हैं। 16वें वित्त आयोग की राशि जल्द जारी होनी चाहिए। -बोदी देवी, उपाध्यक्ष, जिला परिषद, थाची वार्ड
हम लगातार सरकार के संपर्क में हैं। किस्त जारी होते ही अगली बैठक में प्राथमिकताएं तय कर सभी वार्डों में समान रूप से विकास कार्य शुरू करवाए जाएंगे। -अमरू राम, अध्यक्ष, जिला परिषद, खिलड़ा वार्ड