मंडी। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्ज एसोसिएशन मंडी इकाई की बैठक में सरकारी संस्थानों में जेनेरिक दवाएं न होने का मुद्दा खूब गूंजा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार चिकित्सकों को मरीजों के लिए जेनेरिक दवाइयां लिखने के लिए विवश कर रही है लेकिन, ये दवाएं सरकारी संस्थान एवं मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सरकारी निर्देश महज हवाई साबित हो रहे हैं। बैठक में सरकार से आग्रह किया कि दवाइयों की अधिकतम मूल्य सीमा निर्धारित कर उसकी गुणवत्ता को नियंत्रित किया जाए और जेनेरिक दवाइयों को प्रदेश भर के मेडिकल स्टोरों और सरकारी संस्थानों में उपलब्ध करवाया जाए। जबकि मेडिकल कॉलेजों में सहचार्य के पदों पर योग्य एवं पात्र चिकित्सकों की डीपीसी तैनाती देने सहित अन्य मांगों को भी उठाया गया। बैठक शनिवार को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में एसोसिएशन के प्रधान डा. जितेंद्र रोड़के की अध्यक्षता में आयोजित की गई। महासचिव डॉ. विकास ठाकुर ने बताया कि एसोसिएशन की विभिन्न समस्याओं एवं मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. देवेंद्र शर्मा, सहसचिव डा. दुष्यंत ठाकुर, महासचिव डा. विकास ठाकुर, सहसचिव डा. जयंत ठाकुर, प्रेस सचिव डा. दीपक गुप्ता, डा. वीरेंद्र ठाकुर, डा. हिमांशु कपूर, डा. राजन विशिष्ट, डा. अरिंदम रॉय, डा. टीसी महंत, डा. अरविन बहल और डा. सुनील चंदेल सहित जिले के विभिन्न खंडों से आए चिकित्सकों ने भाग लिया।
पर्ची मूल्यांकन रद्द हो, डीओजे से मिले वरिष्ठता लाभ
बैठक में चर्चा हुई कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में मात्र एक चिकित्सक 30 से अधिक मरीजों की जांच कर रहा है, वहां पर्ची मूल्यांकन के अनुसार मरीजों को देखना संभव नहीं है। ऐसे में समयाभाव के चलते संस्थानों में पर्ची मूल्यांकन रद्द करने की मांग हुई। कर्मचारियों को 4-9-14 वेतन वृद्धि का शीघ्र निपटारा करने और कर्मचारियों का सेवाकाल पूरा होने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ही उन्हें वेतन वृद्धि का लाभ देने की मांग उठाई गई। चिकित्सकों की वरिष्ठता का लाभ उनकी डेट ऑफ ज्वाइनिंग से दिया जाए।
यहां सरकार का समर्थन
एसोसिएशन ने सरकार की ओर से कर्मचारियों की सेवाकाल वृद्धि को सभी विभागों से रद्द करने के निर्णय का समर्थन किया है। जबकि प्रदेश को 200 चिकित्सक देने के लिए मंडी इकाई ने सरकार का आभार जताया है। साथ में 8 परसेंट अंतरिम राहत देने पर भी आभार जताया है। वहीं संघ ने स्वास्थ्य विभाग में जिन चुनिंदा व्यक्तियों को सेवाकाल वृद्धि दी जा रही है उसे शीघ्र रद्द करने की मांग उठाई है ताकि योग्य वरिष्ठ अधिकारियों को उनका हक मिल सके।
पूर्व और वर्तमान के इस निर्णय पर रोष
एसोसिएशन ने रोष जताया कि पूर्व में कैबिनेट में चिकित्सा अधिकारियों को वर्ष 2018 से रेगुलर एवं एडहॉक बेस पर तैनात करने का निर्णय लिया था। लेकिन, वर्तमान सरकार उन्हें दोबारा अनुबंध पर रख रही है। ऐसे में प्रदेश के काबिल चिकित्सक पलायन कर रहे हैं और मरीजों को बेहतर उपचार से महरूम रहना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग में लगभग 20 से अधिक खंड चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, स्वास्थ्य उप निदेशकों के रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरने का सरकार से आग्रह किया है तथा पीजी पॉलिसी में बदलाव करने और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात चिकित्सकों को दस प्रतिशत से तीस प्रतिशत का लाभ देने की मांग उठाई।