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पांच से छह रुपये प्रति किलो बिक रहा आलू

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बरोट (मंडी)। चौहारघाटी और छोटा भंगाल की 20 पंचायतों के किसानों की वर्ष भर की आलू की नकदी फसल के शुरुआती सीजन में कौड़ियों के भाव मिल रहे हैं। इससे किसानों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इन दोनों क्षेत्रों के सैकड़ों किसान आलू की फसल पर ही निर्भर करते हैं। किसान घोड़ों और खच्चरों पर मीलों दूर से सड़क तक आलू की फसल पहुंचा रहे हैं। इससे ढुलाई में ही किसानों के प्रति किलो आलू की ढुलाई पर दो से तीन रुपये खर्च हो रहे हैं। बरोट और टिक्कन की सड़क पर यह आलू किसान पांच से छह रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं। प्रति किलो के हिसाब से इन किसानों को महज तीन से चार रुपये बच रहे हैं। बाकी पैसा ढुलाई में निकल रहा। किसानों को महज चार रुपये से संतोष करना पड़ रहा है। हालात यह है कि किसानों की सालभर के रोटी देने वाली आलू की नकदी फसल कौड़ियों के दाम बिक रही है। यहां पर किसानों की वर्षों से चली आ रही सब्जी मंडी की मांग पूरी न होने से दिक्कतें बढ़ी हैं। आलू के उचित दाम न मिलने से यहां पर फसल के बीज की कीमत तक पूरी नहीं हो रही है। वहीं, जिन किसानों ने ऋण लेकर फसल लगाई थी उनकी समस्या तो दोगुना हो गई है। टिकन में सब्जी मंडी खोलने के प्रयास किए गए थे। लेकिन, यह प्रयास वर्षों बाद भी सिरे नहीं चढ़े हैं। हालात यह है कि वर्षों बाद भी पीठ अथवा घोड़े पर मीलों दूर से ढोकर सड़क पर किसान आलू की फसल को बेच रहे हैं। स्थानीय विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि टिकन में सब्जी मंडी खोली जाएगी। इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।
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70 हजार बैग मंडियों में होते हैं सप्लाई
चौहारघाटी में हर साल 60 से 70 हजार बैग आलू अगस्त से दिसंबर तक मंडियों में सप्लाई होता है। किसानों चमेल, सीता राम, राम सिंह, भजन सिंह, लछमन सिंह, प्रेम सिंह, कृष्ण, दौलत, जगदीश ने कहा कि बरोट और टिकन की सड़कों पर 5 से 6 रुपये किलो आलू बिक रहा है। जबकि, इन इलाकों के लगभग चार दर्जन गांव सड़क से दूर होने के चलते घोड़े, खच्चर से 2 से 3 रुपये प्रति किलो ढुलाई देकर आलू को सड़क तक पहुंचा रहे हैं। चौहारघाटी के दूरदराज गांव पंजोड, खबान, लटरान, रोलिंग, लछयान, झुकान, मधरबाण, स्मालंग में आलू किसान पीठ पर उठाकर सड़क तक ला रहे हैं। किसानों गत वर्ष अगस्त माह में 15 रुपये प्रति किलो आलू के दाम मिले थे। किसानों का कहना कि क्षेत्र में सब्जी मंडी न होने से उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में सब्जी मंडी खोलने की स्थानीय विधायक और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर से मांग उठाई है।
किसानों की माने से चौहारघाटी के दर्जनों गांवों में कई किसानों ने ऋण लेकर भी आलू की फसल लगाई है। गत वर्ष आलू के अच्छे दाम मिलने से क्षेत्र के किसानों में उत्साह था। गत वर्ष के आधार पर किसानों ने खूब फसल लगाई थी। इसके लिए किसानों ने ऋण तक लिए थे। लेकिन, अब उचित दाम न मिलने से ऋण वापस करना भी मुश्किल हो गया है। जितने फसल के दाम मिल रहे हैं उससे परिवार का गुजारा तो दूर फसल के बीज का दाम भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
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