गोहर (मंडी)। कमरूघाटी में शुक्रवार दोपहर बाद करीब दो घंटे जमकर बादल बरसे। बिजली के साथ मूसलाधार बारिश, अंधड़, ओलावृष्टि से किसानों की मक्की और मटर की फसल बुरी तरह से तबाह हो गई। प्रकृति के दो घंटे के इस कहर से हजारों किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। बारिश और हवा इतनी तेज थी कि लोगों के घरों के भीतर बारिश का पानी पहुंच गया। किसानों की जमीन बह गई। खेत पानी से लबालब हो गए और मक्की की खड़ी फसल मानों किसी ने जमीन पर गिरा दी हो। कमरूघाटी में दो घंटे हुए प्रकृति के इस तांडव ने सनसनी फैला दी। रास्तों, सड़कों और खेतों से बहता पानी चारों ओर फैल गया। जिससे लोग दहशत में पड़ गए। कमरूघाटी के खेतों में किसानों की ओर से बिजाई किया गया मटर का बीज भारी बारिश के कारण जमीन से खुले आसमान के नीचे आ गया। जिससे किसानों को भारी झटका लगा है। ओलों ने भी बारिश के साथ खूब नुकसान किया। कमरूघाटी के बरनाला, कटेरल, टटासी, कशमाली, रडा, कून, सहरी, कहरेधार, उखलू और कुटाहची गांव में भयंकर बारिश ने तबाही मचा दी। बारिश का बहाव इतना तेज था कि कई हेक्टेयर जमीन पानी में बह गई। कमरूघाटी के किसानों चंद्रमणी, ठाकर दास, नवीन गुरुंग, दीनानाथ, दिनेश कुमार, मुरारी लाल, एसके ठाकुर, दुर्गा दास ठाकुर, वार्ड पंच दीवान चंद, हिमाचली देवी, मीरा देवी, नीटू, लीला देवी और देवीराम ने बताया कि शुक्रवार को दो घंटे बारिश ने कोहराम मचाकर किसानों के लाखों डुबो दिए हैं। किसानों के अनुसार इस बार कमरूघाटी में करीब 50 लाख से अधिक के मटर की किसानों ने बिजाई की है। जिस पर बारिश और ओलों की मार पड़ने से किसानों की कमर टूट गई है। किसानों को अब चिंता है कि मटर जमीन से बाहर निकलेगा या नहीं। उधर, किसानों की मक्की की खड़ी फसल हवा और बारिश ने धराशायी कर दी है। जिससे किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं। लोगों के मकानों की छत्तों से स्लेट उखड़ गई हैं। जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि चैलचौक पेट्रोल पंप के पास पेड़ पर बिजली गिरी। जिससे अफरा-तफरी मच गई।
नुकसान का आकलन करने के निर्देश
कृषि विभाग के गोहर स्थित विषयवाद विशेषज्ञ डा. खूबराम चौहान ने कमरूघाटी में बारिश से नुकसान की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रसार अधिकारी को नुकसान का आकलन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। नाचन के विधायक विनोद कुुमार ने सरकार से मांग की है कि क्षेत्र के किसानों की फसलों को हुए नुकसान का उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
तबाही को धार्मिक मान्यता से भी जोड़ रहे
शनिवार को नाग पंचमी है। कमरूघाटी में मान्यता है कि बड़ा देव कमरूनाग घोघराधार में अगर डायनों के साथ हुए युद्ध में विजयी होते हैं तो किसानों का भारी नुकसान होता है। शुक्रवार रात को बड़ा देव कमरूनाग घोघराधार से अपने अन्य देवी देवताओं के साथ मूल स्थल कमरूनाग लौटेंगे। जहां नाग पंचमी पर गूर खेल के माध्यम से बताएंगे कि कमरूनाग की जीत हुई है या हार। शुक्रवार को कमरूघाटी में हुई भारी तबाही को किसान और लोग धार्मिक मान्यता से भी जोड़ रहे हैं।