अमर उजाला ब्यूूरो
मंडी। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने सात जेबीटी अध्यापकों से वसूली करने के आदेशों को निरस्त करते हुए खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने अध्यापकों को पे फिक्सेशन के लिए दस दिनों के भीतर प्रतिवेदन करने और शिक्षा विभाग को 6 सप्ताह के भीतर इन प्रतिवेदनों पर सुनवाई पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के सदस्य (न्यायिक) डीके शर्मा की पीठ ने मंडी सर्किट के सुनाए फैसलों में याचिकाकर्ता जेबीटी अध्यापक प्रीतम चंद, चमन लाल, मदन लाल, जगदीश कुमार, अमर नाथ, पवन कुमार और ललिता रानी की याचिकाएं स्वीकारते हुए उनसे क्रमश: 154339, 156351, 154452, 115106, 154451, 153240 और 105011 रुपयों की वसूली के विभागीय आदेशों को निरस्त करने का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिकाओं के मुताबिक विभाग ने याचिकाकर्ताओं से वसूली करने के आदेश जारी किए थे, जिन्हें याचिकाकर्ताओं ने ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी। विभाग का इन मामलों में कहना था कि ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक इन अध्यापकों को एड हॉक अवधि के लाभ दिए थे।
स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीहा का दिया हवाला
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय की ओर से स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीहा मामले में दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि क्लास तीन और चार के कर्मियों को जारी की गई अधिक राशि की वसूली नहीं की जा सकती है। इसके चलते ट्रिब्यूनल ने विभाग की ओर से जारी वसूली आदेशों को निरस्त करते हुए उन्हें खारिज कर दिया। इसके अलावा पे फिक्शेसन के लिए ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिनों के भीतर विभाग को प्रतिवेदन सौंपने को कहा है। साथ ही ट्रिब्यूनल ने विभाग को याचिकाकर्ताओं के प्रतिवेदनों पर छह सप्ताह के भीतर कार्यवाही पूरी करने के भी निर्देश जारी किए हैं।