अमर उजाला ब्यूरो
गोहर (मंडी)। जिले के सेब बगीचों में स्कैब रोग फैलने से बागवानों में हड़कंप की स्थिति है। सराज में स्कैब रोग पर काबू पा लिया गया है। जबकि, शेष सेब बेल्ट पर खतरा बरकरार है। सेब बगीचे में बागवानी विशेषज्ञों की जरूरी स्प्रे करने की हिदायत बागवानी विभाग ने जारी कर दी है। वहीं, प्रभावित क्षेत्रों में विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए शिविर लगा रहा है। अधिकारियों ने बगीचों का दौरा कर रोग को समझा और बागवानों को विभाग की ओर से सुझाई गई दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी। इससे रोग पर नियंत्रण पाया जा सका।
बागवानी उपनिदेशक एपी कपूर ने बताया कि सेब का फल जब अखरोट के आकार का हो तो स्कैब से बचाव के लिए 200 लीटर पानी में 80 ग्राम माइक्लोबूटानिल या 600 ग्राम मैनकोजैब या प्रोपिनेब अथवा 150 ग्राम डोडीन या मैटीसम 55 प्रतिशत के साथ 5 प्रतिशत पयराक्लोस्ट्रोबिन डब्ल्यूजी की 300 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अल्ट्रनेरिया लीफ स्पॉट, स्कैब और असमय पतझड़ की रोकथाम के लिए टेबुकोनाजोल आठ प्रतिशत और कैपटान 32 प्रतिशत को 500 मिलीलीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें। सेब के फल को अखरोट के आकार से 20 दिन बाद की स्थिति में असामयिक पतझड़ से बचाव के लिए टेबुकोनाजोज 50 प्रतिशत, जबकि ट्राईफलोक्सिस्ट्रोबीन की 25 प्रतिशत मात्रा को मिलाकर 80 ग्राम दवा तैयार कर उसका 200 लीटर पानी में घोल तैयार कर छिड़काव करें। स्कैब के लिए प्रोपिनेब या जीनेब 600 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। सेब को तोड़ने से 20 से 25 दिन पहले स्कैब, फलाई, स्पैक, बिटर रॉट, स्कैब से बचाव के लिए 600 ग्राम कैप्टान या जीरम को 200 लीटर पानी, अल्ट्रनेरिया लीफ स्पॉट ब्लाइट से रोकथाम के लिए मैटिसम 55 प्रतिशत और पयराक्लोस्ट्रोबिन डब्ल्यूजी की 5 प्रतिशत मात्रा से 300 ग्राम दवा तैयार कर 200 लीटर पानी में घोल तैयार कर छिड़काव करना सुनिश्चित करें। छिड़काव के दो घंटे के भीतर यदि भारी बारिश होती है तो अगले दिन दोबारा छिड़काव करें। डोडीन के साथ अन्य कोई भी फंफूदनाशक और रसायन न मिलाएं। यदि तापमान 30 डिग्री से अधिक तो डोडीन का छिड़काव न करें।