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फोरलेन विस्थापितों पर अब टीसीपी की मार

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नगवाईं (मंडी)। फोरलेन विस्थापन का दंश झेल चुकी हजारों की आबादी को अब नए आशियाने और रोजगार देना भी गले की फांस होगा। फोरलेन प्रभावित स्नोर घाटी के थलौट से झिड़ी तक के 17 राजस्व मुहाल को प्रदेश सरकार ने टीसीपी के दायरे में ले लिया है। 186 हेक्टेयर भूमि पर गुजर बसर करने वाली लगभग 16000 की आबादी टीसीपी के दायरे में आ रही है। इसमें कुछ पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल हैं। इसके लिए सर्वे शुरू हो चुका है। ऐसे में टीसीपी के सख्त प्रावधानों के चलते न केवल संबंधित क्षेत्र में गृह निर्माण की औपचारिकताएं मुश्किल होंगी, जबकि बिजली, पानी के कनेक्शन लेने के लिए भी पापड़ बेलने पड़ेंगे। ऐसे में स्थानीय जनता में आक्रोश पनपने लगा है। टीसीपी के दायरे में औट, किगस, कोटधार, टकोली, नगवाईं, झिड़ी, पनारसा, पलसेहड़, झिड़ी, टकोली, शिलह, मशोरा, संनसोई, कोटाधार, सोझा, भाटमार, डीपी एफ नाऊ, दोघरी, औट, दीप, फ कटी, खीनी, थलौट, खमरा आदि क्षेत्र आ रहे हैं।
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क्या कहते हैं लोग
ग्रामीणों श्याम लाल, बिमला देवी, देवी सिंह, पूर्ण चंद, नवीन, सोहन लाल कपूर, सुदर्शना, ज्योति कपूर, त्रिलोक सिंह, इंद्रा देवी, मोहर सिंह, भागी देवी, भीम सेन आदि ने पंचायत के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उनकी पंचायतों को तब तक टीसीपी के दायरे से बाहर रखा जाए जब तक लोग फोरलेन से उजड़े अपने मकान व व्यवसाय को सही तरीके से स्थापित न कर पाएं। साथ ही जगह-जगह से अनापत्ति प्रमाणपत्र बनाने की बजाय पंचायत के माध्यम से ही लोगों को सुविधा मिले।
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लोगों की बर्बाद होगी दस मीटर भूमि
फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने बताया कि लोग अभी फोरलेन के विस्थापन से उबर नहीं पाए और अब टीसीपी के दायरे में आने से लोगों को अपने मकान बनाते वक्त दो मीटर पीछे व तीन मीटर आगे और किनारे पर डेढ़ मीटर जगह खाली छोड़नी पड़ेगी। साथ ही फोरलेन की कंट्रोल विड्थ से पांच मीटर और भूमि खाली छोड़नी पड़ेगी जिससे लोगों की लगभग दस मीटर भूमि बरबाद हो जाएगी।
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