पद्धर (मंडी)। द सहकारी सभा सीमित उरला के सभागार में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण शिमला के सौजन्य से सोमवार को वित्तीय कानूनी सहायता के तहत जागरूकता शिविर लगाया गया। अधिवक्ता लक्ष्मी शर्मा और पीएलवी वीरेंद्र शर्मा ने निशुल्क कानूनी अधिकारों के प्रति सचेत किया। इस दौरान सहायता के लिए पात्रता, मुफ्त कानूनी सहायता के तहत प्रदान की जाने वाली सेवाएं, विधिक सेवा कैसे और कहां से प्राप्त करने के तरीके और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई। अधिवक्ता ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति से संबंधित लोग, संविधान के अनुच्छेद 23 में मानव दुर्व्यवहार का शिकार व्यक्ति, महिला या नाबालिग, मानसिक रोगी या दिव्यांग, औद्योगिक श्रमिक, ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय एक लाख से कम हो और वरिष्ठ नागरिक जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो, सालाना आय दो लाख से कम हो तथा एचआईवी या एड्स से पीड़ित व्यक्ति निशुल्क कानूनी सहायता के लिए पात्र हैं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा हिरासत में रखे गए व्यक्ति को तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश के सभी दंडाधिकारियों की अदालतों में वकीलों की नियुक्ति की गई है। वहीं कानूनी विवादों के मैत्रीपूर्ण समाधान के लिए सभी जिलों में स्थायी और सतत लोक अदालतें स्थापित की गई हैं, जबकि ग्रामीण एवं जनजातीय और दुर्गम इलाकों में जागरूकता शिविरों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत तमाम सुविधाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। इस मौके पर पंचायत उपप्रधान पूर्ण चंद और कई ग्रामीण उपस्थित रहे।