जोगिंद्रनगर (मंडी)। नगर परिषद जोगिंद्रनगर ने घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए निजी ठेकेदार को कार्य सौंपे जाने का फैसला तो ले लिया लेकिन, घर घर से कूड़ा उठाने की योजना फिलहाल सिरे नही चढ़ पाई है। हालांकि इसके लिए नगर परिषद ने निविदा आमंत्रित कर शहर का कूड़ा घर-घर से उठाने और अन्य कूड़ा एकत्रित करने की एवज में लगभग 1 लाख 90 हजार निजी ठेकेदार को देने के लिए करार किया। लगभग डेढ़ माह पूर्व निजी ठेकेदार को सफाई का काम भी सौंप दिया गया। लेकिन, वर्तमान में निजी ठेकेदार ने कूड़ा उठाने के उसी कार्य को अंजाम दिया जा रहा है जो पूर्व में नगर परिषद के नियमित सफाई कर्मी करते थे। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि निजी ठेकेदार द्वारा यही सफाई कार्य ही करना है तो नगर परिषद द्वारा यह कार्य अपने ही सफाई कर्मियों से क्यों नहीं करवाया जा रहा। नगर परिषद में कार्यरत नियमित सफाई कर्मियों का लाभ न लेकर महज ठेकेदार को पैसे देकर सरकारी पैसे का दुरुपयोग क्यों किया जा रहा है। मौजूदा समय में नगर परिषद जोगिंद्रनगर के पास लगभग 10 से अधिक नियमित सफाई कर्मी कार्यरत हैं तथा नगर परिषद की ओर से सफाई का कार्य निजी ठेकेदार को सौंपे जाने के बाद इन नियमित सफाई कर्मियों के पास कोई विशेष कार्य नहीं है। नगर परिषद की ओर से घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना को लागू करने के उद्देश्य से ही सफाई का कार्य निजी ठेकेदार को सौंपा गया था। नगर परिषद जोगिंद्रनगर के पार्षद एवं पूर्व उपाध्यक्ष अजय धरवाल का कहना है कि लगता है कि नगर परिषद उपरोक्त कार्य को अंजाम देने के प्रति गंभीर नहीं है तथा निजी ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए इस योजना के प्रति आंखें मूंद ली गई हैं। नगर परिषद की ओर से घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना पूर्व नगर पंचायत कार्यकाल में ही बनाई गई थी। जिस पर वर्तमान नगर परिषद ने घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए निजी ठेकेदार को कार्य तो सौंप दिया गया लेकिन, योजना शुरू नहीं हो पाई है। नगर परिषद को चाहिए कि घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना शीघ्र शुरू की जाए।