बालीचौकी (मंडी)। डायरिया प्रभावित क्षेत्रों में आईपीएच, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। जलजनित रोगों से निपटने के इंतजाम पुख्ता होने के अफसरशाही के दावे महज झूठ साबित हो रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण खलवाहन गांव है। जहां डायरिया से चार वर्षीय मासूम की मौत हो चुकी है। जबकि, उसी घर का एक अन्य बच्चा और वृद्ध महिला डायरिया की चपेट में आ चुके हैं और यह रोग तेजी से पांव पसार रहा है। लेकिन, शायद प्रशासन और विभाग को यह जमीनी हकीकत नहीं दिख रही है। गांव को सप्लाई किए जाने वाले पानी के फिल्टर, स्टोरेज टैंकों की बदहाली की ग्राउंड रिपोर्ट इस अफसरशाही के दावों को हवा करने के साथ साथ सरकारी तंत्र की खिल्ली भी उड़ा रही है। सवाल उठ रहा है कि आखिर जलजनित रोग से हुई मासूम की मौत का कौन जिम्मेवार है?
बालीचौकी से करीब बीस किलोमीटर दूर खलबाहन पंचायत का सुधारणी गांव। जहां फिल्टर/ स्टोरेज टैंक बना हुआ है। यहां से खलबाहन गांव को सीधी पाइपों के माध्यम से सप्लाई जोड़ी हुई है। इस गांव में करीब 600 लोग बसे हैं। शनिवार को करीब पौने एक बजे वाटर स्टोरेज/फिल्टर टैंकों का निरीक्षण किया गया। दो वाटर टैंकों में एक पानी से भरा था तो दूसरा खाली। दोनों को ढकने के लिए किसी तरह की छत नहीं बनी है। न ही कोई इर्द गिर्द सुरक्षा दीवार का इंतजाम किया गया है। पानी खुले में स्टोर हो रहा है। जिसमें गंदगी भी गिरी हुई है। जो पानी की शुद्धता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। डायरिया पीड़ित खलबाहन गांव को पानी के नाम पर मानो जहर परोस रहा है आईपीएच विभाग। बिना ढक्कन के इन टैंकों में कोई भी शरारती तत्व गंदगी फेंक सकता है या मवेशी गिर सकता है।
न क्लोरीनेशन न ही सफाई
हैरत की बात यह है कि जिन टैंकों से डायरिया प्रभावित गांव को पानी की सप्लाई हो रही है, वहां न तो क्लोरीनेशन हुई है और न ही किसी तरह की सफाई की गई है। टैंक की सतह पर काई और पानी में कई चीजें तैर रही हैं और यही पानी गांव को भी सप्लाई किया जा रहा है।
खुला छोड़ रखा है टैंक
जिला परिषद सदस्य संत राम का कहना है कि खलबाहण और सुधरानी गांव में करीब 80 परिवारों के 600 लोग रहते हैं। गांव के सभी लोग इसी पानी पर निर्भर रहते हैं। 2007-2008 में सुधराणी में फिल्टर टैंक का निर्माण किया गया। जहां से पानी स्टोर होकर खलबाहन गांव को दिया जाता है। लेकिन टैंक चारों तरफ से खुला छोड़ दिया गया है। गंदगी के कारण गांव के लोग डायरिया की चपेट में आ रहे हैं और एक चार वर्षीय मासूम की मौत भी हो चुकी है। उन्होंने व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
जल्द बेहतर होगी व्यवस्था
आईपीएच के एसडीओ हर्ष शर्मा ने कहा कि जल्द ही वाटर कम फिल्टर/स्टोरेज टैंक को सुरक्षित किया जाएगा। इर्द गिर्द बाड़ भी लगाए जाएंगे। पानी में क्लोरीन समय समय पर डाली जा रही है। विभाग पूरी तरफ से अलर्ट है। व्यवस्था जल्द सुधारी जाएगी। विभाग साफ और स्वच्छ पानी देने के लिए प्रयासरत है।