मंडी। बहुचर्चित हूमा देवी हत्याकांड के आरोपी को अदालत ने उम्रकैद की सजा का फैसला सुनाया है। इसके अलावा दोषी को 25 हजार रुपये जुर्माना भी अदा करना होगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर के शर्मा की विशेष अदालत ने बालीचौकी तहसील के राही गांव निवासी थलिया राम उर्फ नागू के खिलाफ भादंसं की धारा 302, 366, 364, 201 और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम की धारा 3 के तहत अभियोग साबित होने पर क्रमश: उम्रकैद, पांच-2 साल कठोर तथा साधारण कारावास की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी के निश्चित समय में जुर्माना अदा न करने पर उसे छह-छह माह के अतिरिक्त कठोर और साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ हूमा देवी को अगवा करने, उसकी हत्या करने, शव को एक गुफा में दबा कर साक्ष्यों को नष्ट करने और अनुसूचित जाति की होने के कारण उस पर अत्याचार करने का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उम्रकैद तथा उक्त जुर्माना राशि अदा करने का फैसला सुनाया है।
पहले दिया शादी का झांसा
अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 जनवरी 2015 को शिकायतकर्ता मणि राम ने औट पुलिस थाना में रपट दर्ज करवाई थी कि विगत 1 जनवरी 2015 को वह बालीचौकी से शाम करीब 4 बजे घर पहुंचा तो घर में उसकी 25 वर्षीय अविवाहित बेटी हूमा देवी नहीं मिली। शिकायतकर्ता की पत्नी ने उन्हें बताया कि वह अपनी बहन के घर सैंज बरमारी गांव गई है। शिकायतकर्ता ने जब अपनी बेटी हीरा देवी से इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि हूमा उसके घर नहीं आई है। जिस पर शिकायतकर्ता ने अपने रिश्तेदारों के पास हूमा देवी की तलाश की लेकिन उसका कोई पता न चल सका। इसके बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि आरोपी थलिया राम ने हूमा को शादी का झांसा दिया है। जिस पर उन्होंने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।
और फिर मिला गला सड़ा शव
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की तो आरोपी ने बंशगढ में एक गुफा से दबाया गया हूमा देवी का गला-सड़ा शव बरामद करवाया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ तहकीकात पूरी करने के बाद अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम ने 26 गवाहों के ब्यान कलमबंद करवा कर आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित किया।