मंडी।आजकल जहां युवा दो कदम पैदल चलने के बाद थक हार जाते हैं, ऐसे युवाओं के लिए सुंदरनगर के परमाराम प्रेरणा स्त्रोत बने हैं। जो मात्र एक किडनी के सहारे ही अब तक कई दौड़ स्पर्धाओं में भाग ले चुके हैं। इन्होंने अपनी एक किडनी जीवन और मौत से जूझ रहे एक प्रवासी को दान दे दी थी। इनकी आयु करीब 65 साल है और जहां भी कोई दौड़ प्रतियोगिता होती है वहां इसमें भाग लेने के लिए पहुंच जाते हैं। अब तक कई मेडल और पुरस्कार जीत चुके हैं। मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव पर आयोजित हॉफ मैराथन में भी इन्होंने सीनियर सिटीजन वर्ग में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है। उम्र के इस पड़ाव में भी यह एक युवा से कई गुणा अधिक दौड़ने का मादा रखते हैं। अब तक यह कई मैराथन और हॉफ मैराथन में भाग ले चुके हैं। फौज की नौकरी से 1997 में सेवानिवृत्त होने के बाद यह नियमित रूप से एक धावक के तौर पर विभिन्न दौड़ प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह फौज में रहकर भी कई दौड़ स्पर्धाओं में भाग ले चुके हैं। अब तक दिल्ली, जयपुर, मध्यप्रदेश, बंगलूरू में दौड़ चुके हैं जहां पर उन्हें कई मेडल मिले हैं। 2018 में ही उन्होंने करीब 4 मैराथन में भाग लेकर कई पुरस्कार अर्जित किए हैं। पहली जनवरी को कुल्लू में आयोजित दौड़ में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त करके 21000 रुपये, मंडी में 7 जनवरी को जियो ग्रुप की दौड़ में प्रथम स्थान, पांवटा साहिब में 18 जनवरी को आयोजित मास्टर एथलीट में प्रथम स्थान, शिमला में 22 जनवरी को आयोजित दौड़ में उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया। यहां पर सीएम जयराम ठाकुर ने उन्हें सम्मानित किया।
18 फरवरी को कृषि राज्यमंत्री करेंगे सम्मानित
धावक होने के साथ-साथ ही परमा राम एक किसान भी हैं, जो कृषि की नवीनतम तकनीकों से फसलों को उगाते हैं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। उनको कृषि में भी कई महत्वपूर्ण कार्यों करने के लिए नवाजा जा चुका है। उनसे प्रेरणा लेकर क्षेत्र के कई किसान उनके बताए तरीकों से खेती कर रहे हैं और अच्छी पैदावार भी हासिल कर रहे हैं। इसी के चलते उनको उदयपुर में एक अंतरराष्ट्रीय किसान सम्मेलन में कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सम्मानित करेंगे। इसके लिए वह 15 फरवरी को यहां से रवाना होंगे।
जीवन और मौत से जूझ रहे प्रवासी को दान दी है किडनी
एक सफल धावक, किसान होने के साथ-साथ ही एक समाज सेवी भी हैं। वह समाजसेवा के कई कार्यों में हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने एक बिहार के मजदूर जिसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं और वह जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। उसे अपनी एक किडनी 1998 में आईजीएमसी शिमला में दान दे दी थी। यहां तक कि उन्होंने उसका पता पूछा और न ही अपना पता उसे बताया, ताकि पुण्य का कार्य किसी स्वार्थ में न बदल जाए।