मंडी। सराज के परखाल में बारिश और बर्फबारी के बीच में दूसरे दिन भी फागली उत्सव की धूम रही। इस उत्सव से पूरी घाटी देवमयी हो उठी है। कुल्लू और मंडी जिलों से आए सैकड़ों लोग ऐतिहासिक पलों का गवाह बन रहे हैं। वीरवार को यह उत्सव नैहरा, कटूरणी, परखोल, रांगचा, पाली और थुनाड़ी गांव में जबकि कुल्लू के चेथर, बलागाड़, जीभी और बाहु सहित अन्य गांवों में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने उत्सव में बुराई पर अच्छाई और पाप पर पुण्य, अधर्म पर धर्म की विजय गाथाओं का गुणगान किया। फागली उत्सव में लोगों ने डायनों और बुरी शक्तियों तथा भूत प्रेतों को भगाने के लिए सैकड़ों लोगों के बीच में अश्लील गालियां भी दीं। देवता के कार कारिंदों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
फाल्गुन संक्रांति पर तीन और पांच दिन तक मनाया जाने वाला फागली उत्सव विष्णु-नारायण भगवान के दस अवतारों की लीलाओं का प्रतीक है। उत्सव में देवता के गणों ने परंपरागत तरीके से ढोल, नगाड़े, करनाह्ली, शहनाई, डफला, भाणा, कांसा और काहुली की कलरव ध्वनि के साथ धूमधाम से गाए और देवता विष्णु-नारायण की पालकी के साथ देवक्रीड़ा में भाग लिया।
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देव नारायण के स्वर्गलोक की यात्रा से देवालय लौटने पर मनाया जाता है उत्सव
सराजघाटी के रंजीत शर्मा, केहर सिंह, ओम प्रकाश, योग राज, आलम चंद, सुनील शर्मा, पुनीत कुमार आदि देवलुओं का कहना है कि फागली उत्सव वास्तव में विष्णु नारायण भगवान की पौष माह के अंतिम सप्ताह में स्वर्गलोक की यात्रा और मकर संक्रांति की पूर्व संध्या को भूलोक पर वापसी के बाद उनके पहले धार्मिक अवतार समारोह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान उनके द्वारा रचाई गई लीलाओं का गुणगान 18 लोक गीतों के माध्यम से किया जाता है।
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उत्सव में अश्लील गालियों को नहीं माना जाता बुरा
घाटी में अश्लील गालियों को फागली उत्सव का एक अंग माना जाता है, इसलिए इन्हें बुरा नहीं माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाओं द्वारा भी इन अश्लील गालियों को गीतों के माध्यम से गाने की परंपरा है जिस कोई पुरुष अपशगुन न होने के भय से शामिल नहीं होता है।
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