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मंडी में पीलिया का एक और मामला, चपेट में आई 13 साल की बच्ची

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मंडी। सूबे में पीलिया लगातार पांव पसार रहा है। मंडी जिले के उपमंडल सुंदरनगर में एक 13 वर्षीय बच्ची की मौत के बाद इसी उपमंडल के डैहर क्षेत्र में इसी उम्र की एक बच्ची में पीलिया पाया गया है। जोनल अस्पताल मंडी की लैब में बच्ची की हेपेटाइटिस बी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। यहां पर चिकित्सकों ने प्रारंभिक उपचार के बाद बच्ची को पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया है। हालांकि, पीलिया पीड़ित 13 वर्षीय बच्ची की हालत स्थिर है। लेकिन, लगातार सामने आ रहे पीलिया के मामलों से जलजनित रोगों का प्रकोप बढ़ता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार डैहर क्षेत्र की आरती देवी को पीएचसी डैहर में उपचार के बाद सुंदरनगर के लिए रेफर कर दिया गया था। सुंदरनगर में परिजनों ने निजी अस्पताल में बच्ची का उपचार करवाया। यहां पर उसके पीलिया पीड़ित होने का पता चला। निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्ची को जोनल अस्पताल मंडी के लिए रेफर कर दिया। यहां पर सरकारी लैब में टेस्ट रिपोर्ट में बच्ची में हेपेटाइटिस बी होने की पुष्टि हुई। जिसके बाद चिकित्सक ने बच्ची को पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया। सीएमओ मंडी डॉ. डीआर शर्मा ने मामले की पुष्टि की है।
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पीलिया के कारण
पीलिया एक बहुत ही सूक्ष्म वायरस से होता है। इस रोग के होने का मुख्य कारण गंदा पानी या किसी भी प्रकार की गंदगी होती है। जिन लोगों के आसपास साफ सफाई नहीं रहती, उनके यहां इस रोग के बढ़ने का खतरा अधिक रहता है। वायरल हेपेटाइटिस बी नामक कीटाणु से होने वाला पीलिया किसी भी मौसम में हो सकता है। इस रोग के वायरस मल में पाए जाते हैं। पीलिया संक्रमित व्यक्ति के मल, दूषित जल, दूध अथवा भोजन द्वारा फैलता है। वायरल हेपेटाइटिस बी खून और खून से निर्मित पदार्थों के आदान-प्रदान और यौन क्रिया द्वारा भी फैल सकता है।

बीमारी के लक्षण
आंख के सफेद भाग का पीला होना, आमाशय में सूजन आना, जी मचलना, उल्टियां आना, त्वचा का रंग हल्का पीला होना, दाहिनी पसलियों के नीचे भारीपन आना और उनमें दर्द होना, पेट में दर्द होना, भूख नहीं लगना, लगातार वजन में कमी होना, शाम के समय थकावट महसूस होना, 102 के आस पास बुखार रहना, जोड़ो में दर्द होना, शरीर में खुजली होना आदि इसके लक्षण हैं।
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उबाल कर ही पीएं पानी : डा. शर्मा
सीएमओ मंडी डॉ. डीआर शर्मा ने कहा कि वैसे तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन सावधानी बरतना हमारी जिम्मेदारी है। पानी को कम से कम बीस मिनट तक उबाल कर पीएं। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस बी अधिक घातक होता है। वायरल हेपेटाइटिस बी खून और खून से निर्मित पदार्थों के आदान-प्रदान और यौन क्रिया द्वारा भी फैल सकता है। इससे बचने के लिए इंजेक्शन लगवाते वक्त विशेष ध्यान रखे। 13 वर्षीय बच्ची में हेपेटाइटिस बी का मंगलवार को एक मामला सामने आया है। बच्ची को पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया है।
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