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गोहर (मंडी)। सूबे में एक बार फिर पर्यावरण मित्र अंगोरा खरगोश पालन को बढ़ाना देने के लिए निजी कंपनी के उद्योगपतियों ने हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया है। अंगोरा खरगोश की ऊन में एकाएक बढ़ोतरी होने और इसके वस्त्र और धागे की बढ़ती मांग के चलते देश विदेश में अंगोरा उत्पादों की मांग बढ़ गई है। इसके चलते अंगोरा पालन में देश-विदेश में नाम कमाने वाले मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में एक बार फिर इस पर्यावरण मित्र व्यवसाय के दिन बहुरने वाले हैं। अंगोरा ऊन के दाम आजकल 16 सौ रुपये से लेकर 2 हजार रुपये तक चल रहे हैं। देश विदेश में अंगोरा ऊन, अंगोरा ऊन का धागा, अंगोरा मफलर, अंगोरा टोपी और अंगोरा शॉल तथा स्टाल से लेकर अनेक प्रकार के उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ गई है। मंडी, कुल्लू, कांगड़ा में करीब 2 हजार किसान पर्यावरण मित्र अंगोरा खरगोश पालन से जुड़े थे, लेकिन प्रदेश में सरकार की ओर से खोले गए वूल एकत्रीकरण केंद्रों को सरकार ने कुछ समय बाद बंद कर दिया, जिससे किसानों को भारी आघात लगा। निजी क्षेत्र में भी अंगोरा ऊन की मांग कम हो गई। जिससे किसानों ने इस व्यवसाय को अपनाना धीरे-धीरे छोड़ दिया। अब एक बार फिर देश और विदेश से अंगोरा ऊन के उत्पादों की मांग बढ़ने लगी है। इससे हिमाचल प्रदेश में निजी कंपनियों के उद्योगपतियों ने इस व्यवसाय को पुन: जीवित करने को लेकर पहल शुरू कर दी है। महादेव वूलन मिल्ज के प्रबंधक निदेशक जय कुमार ने बताया कि पूर्व की भांति अगर किसान अंगोरा पालन से फिर जुड़ जाएं तो किसान तीन माह में हजारों की आय अर्जित कर सकते हैं। महंत वूलन मिल्ज के मालिक पूर्ण महंत का कहना है कि किसान पार्ट टाइम बिजनेस से भी इस व्यवसाय को जोड़ें तो खेतों के लिए गोबर खाद और एक अच्छी आय का जरिया बन सकता है। मंडी जिला अंगोरा खरगोश संघ के अध्यक्ष ओपी नेगी ने बताया कि सरकार अगर प्रोत्साहन दे और निजी कंपनियां अंगोरा ऊन की मार्केटिंग की जिम्मेवारी लें तो मंडी जिले में हजारों किसान इस व्यवसाय को पुन: शुरू कर सकते हैं। खरगोश पालकों मनोज ठाकुर, तिलक राज, एसके ठाकुर, यशपाल शर्मा, सूरजमणी और गीतानंद ने बताया कि सरकार प्रदेश में अंगोरा ऊन का समर्थन बढ़ाए और अपने सभी वूल एकत्रीकरण केंद्र फिर से शुरू करे तो वे अंगोरा पालन शुरू कर सकते हैं।