अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सुंदरनगर में अमर उजाला की ‘अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ थीम के साथ जागरूकता का संदेश दिया गया। इसमें कॉलेज की छात्राओं और उपस्थित अन्य लोगों को महिला हिंसा पर लगाम लगाने के लिए जागरूकता लाने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में 1500 से अधिक छात्राओं ने महिला सशक्तीकरण के लिए मिलजुल कर कार्य करने की शपथ ली और शपथपत्र भी भरा।
सुंदरनगर के एमएलएसएम कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएम डॉ. अमित कुमार (आईएएस) मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि महिला हिंसा तभी रुक सकती है, जब पुरुष अपनी सोच बदलें। समाज में अपने एकाधिकार को छोड़कर महिलाओं को भी समान अधिकार दें। उन्होंने कहा कि लड़का हो या लड़की दोनों समाज के अभिन्न अंग हैं। समाज को अगर चलाना है तो इसमें दोनों को साथ लेकर चलना होगा। डॉ. सीपी कौशल ने कहा कि अमर उजाला का यह अभियान समाज को नई दिशा दे रहा है। अगर हम ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें तो किसी अभियान की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए अपनी सोच बदलने की जरूरत है। प्राचार्य डॉ. पवन जंवाल ने कहा कि सभी लोग बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़ें। घर और बाहर दोनों स्थानों पर महिलाएं उत्पीड़न का शिकार होती रही हैं। चुप्पी किसी भी मामले का समाधान नहीं है। इसलिए अब इस हिंसा के खिलाफ महिला और पुरुष दोनों को आवाज उठाने का समय आ गया है।
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किसने क्या कहा
डॉ. शशीकांत ने छात्राओं में सशक्तीकरण को लेकर जोश भरते हुए कहा अब समय आ गया है कि विधानसभा और संसद में भी महिलाओं की पुरुषों के बराबर भागीदारी हो। अनिल गुलेरिया ने कहा, छात्राएं अपने घर-गांव में जाकर इसको लेकर जागरूकता अभियान चलाएं। महिलाएं स्वयं को सशक्त करें और समाज को सुदृढ़ बनाएं।
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बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ की अलख जगाई
छात्राओं सहित उपस्थित सभी लोगों ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अपराजिता का मान बढ़ाओ के नारे लगा कर नारी सशक्तीकरण को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। छात्राओं ने बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ पर गीत और कविताएं भी प्रस्तुत कीं। इस मौके पर एससीए अध्यक्ष डिंपल ठाकुर को सम्मानित भी किया गया।
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क्या है अभियान
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अमर उजाला की नारी गरिमा के लिए एक साझा मंच तैयार करने की मुहिम है। समाज का नकारात्मक माहौल हमारे लिए चुनौती है। अमर उजाला ने इस जड़ता को तोड़ने की जिम्मेदारी उठाई है। इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत है समुदाय निर्माण की। यह ऐसा समुदाय होगा जो नारी गरिमा को लेकर सतर्क और हमेशा प्रयासरत भी हो।