रिवालसर (मंडी)। बैसाखी मेले के दूसरे दिन पवित्र रिवालसर झील में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने जहां पवित्र झील में स्नान करके पुण्य कमाया, वहीं दूर-दूर से आए देवी-देवताओं के दर्शन भी किए। लोमश ऋषि के मंदिर में पूजा अर्चना के बाद कई श्रद्धालु रिवालसर से लगभग 12 किलोमीटर दूर सरकीधार की पहाड़ियों पर स्थित मां नैणा देवी के दर्शन करने के लिए भी पहुंचे। बैसाखी के पवित्र दिन लोगों ने ग्रह निवारण के लिए तुलादान भी किया। मेले में पहुंची भीड़ ने मेला स्थल पर लगी दुकानों पर भी जमकर खरीदारी की, जिससे दुकानदारों के चेहरे भी खिले हुए दिखे। वहीं, मेला ग्राउंड में लगे विभिन्न प्रकार के झूलों पर झूलकर बच्चों और युवाओं ने खूब मस्ती की। गोर हो कि रिवालसर को तीन धर्माें की तपोस्थली के नाम से जाना जाता है और यहां पर तीन धर्मों के लोगों की गहरी आस्था है। यहां पर समय-समय पर लगने वाले मेलों और उत्सवों में काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं यह एक अनुपम पर्यटन स्थल भी है और 12 महीने यहां पर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है।
काकू राम के नाम रही पहली सांस्कृतिक संध्या
बैसाखी मेले की प्रथम सांस्कृतिक संध्या चंबा से आए काकू राम ठाकुर के नाम रही। उन्होंने सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत गणेश वंदना से की। इसके बाद रोहड़ू जाणा मेरी आमिए और पाणी री टांकी गीत ने युवाओं और दर्शकों को थिरकने के लिए विवश कर दिया। इसके अलावा इस संध्या में अन्य कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर सबका खूब मनोरंजन किया। इन कलाकारों में खेमू चौहान, रोहित सागर और पूनम सरनाइक ने प्रस्तुतियां दीं।