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डीएलएड की शर्त पर ग्रामीण विद्या उपासक संघ तल्ख

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मंडी। ग्रामीण विद्या उपासक संघ (वर्तमान में नियमित जेबीटी) डीएलएड की शर्त पर तल्ख हो गया है। संघ ने शिक्षा विभाग की ओर से एनआईओएस के माध्यम से थोपे गए डीएलएड कोर्स का पुरजोर विरोध जताया है। इस सिलसिले में संघ के शिष्टमंडल ने प्रदेशाध्यक्ष हेमराज ठाकुर की अध्यक्षता में निदेशक प्रारंभिक शिक्षा डा. मनमोहन शर्मा से मुलाकात की है। संघ ने दो टूक डीएलएड की शर्त को निरस्त करने की मांग विभाग के समक्ष रखी है।
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संघ के प्रदेशाध्यक्ष हेमराज ठाकुर ने कहा है कि ग्रामीण विद्या उपासक वर्ष 2002 में प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में नियुक्त किए गए थे और वर्ष 2009-10 में जेबीटी का ब्रिज कोर्स करवाने के बाद ही जेबीटी के पदों पर नियमित हुए थे। लेकिन, आज विभाग ग्रामीण विद्या उपासकों को अप्रशिक्षित करार देकर एनआईओएस के माध्यम से डीएलएड कोर्स करने के लिए बाध्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब ग्रामीण विद्या उपासक नियमित हुए थे तो उस समय डीएलएड जैसा कोई कोर्स नहीं था और अब 15 वर्ष बाद डीएलएड कोर्स जबरदस्ती थोपना सरासर गलत है। संघ का दावा है कि ग्रामीण विद्या उपासक से नियमित हुए जेबीटी शिक्षक उक्त पद के लिए विशेष प्रमाण पत्र हासिल हैं और उनमें से अधिकतर उच्च शिक्षा प्राप्त है तो फिर डीएलएड कोर्स करवाना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। इसके अलावा संघ ने राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से ग्रामीण विद्या उपासकों पर थोपी गई डीएलएड की शर्त का विरोध करने में समर्थन देने पर आभार प्रकट किया है। शिष्टमंडल में मंडी के जिलाध्यक्ष जोध सिंह ठाकुर, बिलासपुर से राकेश कुमार, शिमला से प्रदीप चौहान, महासचिव अरुण, कुल्लू से मनोहर लाल, सोलन से मनमोहन सिंह सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।

1325 ग्रामीण विद्या उपासक हो रहे प्रभावित
शिक्षा विभाग के फरमान से प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में तैनात 1325 ग्रामीण विद्या उपासक जो अब नियमित जेबीटी हैं, प्रभावित हो रहे हैं। वहीं करीब 600 ग्रामीण विद्या उपासक ऐसे हैं, जिन्हें जमा दो कक्षा में श्रेणी सुधार के निर्देश भी दिए हैं। लेकिन, विभाग के डीएलएड के फरमान के चलते उन पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
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