गोहर (मंडी)। मंडी जिले में बेमौसमी मटर का सीजन शुरू हो गया है। पिछले कई दिनों से इंद्र देवता के मेहरबान न होने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही है। मटर की फसल पर अगर अभी भी रिमझिम बारिश गिर जाती है तो किसानों के लिए सोने पर सुहागा वाली बात हो जाती। मगर मटर का तुड़ान सिर पर है और सूखे के कारण मटर की फसल सिकुड़ती जा रही है। बारिश से एक ओर जहां मटर के अनेक तुड़ान होने थे वहीं, किसानों के एक ही तुड़ान पर मटर की खेती सिकुड़ जा रही है। जिससे इस बार किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी जिला में गोहर, चैलचौक, मौवीसेरी, ज्युणीघाटी, जंजैहली घाटी, करसोग वैली और जिला के अनेक क्षेत्रों में मटर की फसल पककर तैयार हो गई है। आजकल मटर के 50 से 60 रुपये प्रति किलो दाम किसानों को मिल रहे हैं। मटर की अच्छी फसल के लिए किसान इंद्र देवता की ओर आस लगाए बैठे हैं मगर आसमान में बादल छंटते जा रहे हैं। जिससे किसानों में निराश छाई हुई है। लंबे समय से मेघ न बरसने के कारण मटर के सीजन में किसानों को लाखों की चपत लग सकती है। दो चार दिन में अगर बूंदाबांदी हो जाती है तो किसानों की चांदी हो सकती है। कमरूघाटी के किसानों चूड़ामणी, चंद्रमणी, मुरारी लाल, ठाकर दास, हेमराज, हिमाचली देवी, बिसमता, मीरा देवी, चमन लाल, देवीराम और परमा राम ने बताया कि इस समय किसानों को बारिश की बेहद जरूरत है। कृषि विषयवाद विशेषज्ञ गोहर खूबराम चौहान ने गोहर क्षेत्र में मटर का सीजन शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सूखे के कारण किसानों को निराशा हाथ लग रही है।