नेरचौक (मंडी)। बीपीएल जैसी कई गरीब उत्थान योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण बल्ह क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां दिव्यांग पति की मौत के बाद उसकी पत्नी दिव्यांग बच्चों के साथ कठिन जीवन जी रही थी। करीब दस साल से इस परिवार को योजना का लाभ नहीं मिल पाया, लेकिन अब जाकर दस सालों के बाद परिवार का नाम बीपीएल श्रेणी में शामिल किया गया है। इस बात को लेकर पंचायतीराज की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि शीतला देवी, जिसका पति शारीरिक तौर पर दिव्यांग था और दस साल पहले ही उसकी मौत हो गई थी। उसे समय यह परिवार बीपीएल में शामिल था, लेकिन उसकी मौत के बाद इस गरीब परिवार को बीपीएल से बाहर कर दिया गया। इसके चलते विधवा दस सालों से अपने दो दिव्यांग बच्चों संग कठिनाइयों भरा जीवन जी रही थी। बीडीओ बशीर खान ने कहा कि शीतला देवी को बीपीएल में शामिल कर लिया गया है। इससे पहले बीपीएल में उनका नाम शामिल क्यों नहीं हुुआ, इसकी जानकारी हासिल की जाएगी।
शीतला देवी के दो बच्चे हैं, वे भी दिव्यांग हैं। इनमें 15 वर्षीय बेटा अमन और 11 वर्षीय बेटी शिवानी शामिल हैं। दस सालों से यह परिवार एक कमरे में रह रहा है और सरकार की ओर से आज तक उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। शीतला देवी स्कूल में खिचड़ी पकाकर परिवार का पेट पाल रही है। इतना ही नहीं, आर्थिक तंगी के चलते उसने बच्चों को स्कूल से हटा दिया है।