सुंदरनगर (मंडी)। लगातार हादसों के बाद भी प्रशासन ओवरलोडिंग पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रहा है। कई बड़े हादसों के बाद ओवरलोडिंग न करने के निर्देशों पर मंडी में अमल होता नहीं दिखाई दे रहा है। सुंदरनगर की चुरढ़ पंचायत के गलुहार में सोमवार सुबह बस हादसा ओवरलोडिंग पर नकेल न कसने का जीता जागता उदाहरण है। अब भी प्रशासन ने सबक नहीं सीखा तो ओवरलोडिंग बड़े भयंकर हादसे का सबब बन सकती है। हादसे के समय बस में करीब 70 लोग सवार थे। जबकि बस की क्षमता 32 सीटों की थी। हादसे में बस चालक की जान चली गई। लेकिन बस में बैठे अन्य लोगों का सौभाग्य रहा कि इस हादसे में जानमाल का अधिक नुकसान नहीं हुआ। हादसे के बाद आरटीओ मंडी कृष्ण चंद ने भी हादसा स्थल का दौरा किया है। उन्होंने इस रूट पर अधिक बसें चलाने को लेकर प्रस्ताव सरकार को भेजने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच की जा रही है।
समस्या : हर रोज यही हाल
बस में केवल आज ही ओवरलोडिंग नहीं हुई थी। इस रूट से जो बसें रोजाना सुबह सुंदरनगर की ओर आती हैं उनमें यही हाल होता है। चुरढ़ क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के लोग और उनके बच्चे रोज सुबह घर से बस लेने के लिए निकलते हैं लेकिन, इस क्षेत्र से सुंदरनगर को आने वाली बसों की कमी है। सुबह सात बजे से 10 बजे तक दो निजी बसें और दो सरकारी बसें ही सुंदरनगर को आती हैं लेकिन, सुबह आठ और नौ बजे के दौरान केवल दो बसें ही होती हैं। जबकि इस दौरान सफर करने वाले यात्रियों की संख्या कहीं अधिक होती है।
अधिकतर स्कूली व कालेज स्टूडेंट
बस में जगह हो या न हो स्कूल और कॉलेज छात्रों को उसमें बैठ कर सुंदरनगर पहुंचना मजबूरी होती है। सोमवार सुबह हादसे का शिकार हुई बस में 59 लोग घायल हुए हैं। जिनमें से अधिकतर स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चे शामिल थे। इसके साथ ही नौकरीपेशा और शहर में खरीदारी करने के लिए घर से निकले लोग थे।
प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी
बस में सवार गांधी राम, हुक्म चंद और महेंद्र ने बताया कि बस में अधिक सवारियां होने के कारण चढ़ाई पर बस चालक मोड़ नहीं काट पाया और उसने बस को पीछे लेकर फिर मोड़ काटने का प्रयास किया। इस दौरान बस के नीचे से किसी चीज के टूटने की आवाज आई। बस चालक ने जैसे ही बस को चलाया उसके बाद वह उससे नियंत्रण खो बैठा और बस सड़क से ढांक की ओर हवा में लटक गई।
कुछ तो खिड़की से कूदे
अनहोनी की आशंका से कई लोग एकाएक बस की खिड़की खोलकर कूद गए। जिसके बाद बस अनियंत्रित होकर ढांक में लुढ़कती चली गई। यह तो सौभाग्य रहा कि नीचे ढांक में पत्थर नहीं थे अन्यथा कई घरों के चिराग इस हादसे में बुझ जाते।