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सीएम जयराम की कैबिनेट में मंडी संसदीय क्षेत्र का वर्चस्व

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मंडी। मंडी संसदीय क्षेत्र की जनता को जो उम्मीद थी, आखिरकार वह पूरी हुई। संसदीय क्षेत्र की 17 में से 14 सीटें जीतकर सूबे में सत्ता की डगर आसान बनाने वाले जनपद को तोहफे में मंडी से सीएम का पद और साथ में मंत्रिमंडल में तीन शीर्ष स्थान मिले हैं। हालांकि चौथे मंत्री महेंद्र सिंह मंडी जिले से हैं लेकिन उनका संसदीय क्षेत्र हमीरपुर पड़ता है। बुधवार को शपथ समारोह के दौरान मुख्यमंत्री जयराम के राज वाली कैबिनेट में मंडी संसदीय क्षेत्र का वर्चस्व कायम रहा। जीत का लगातार सत्ता लगाने वाले महेंद्र सिंह ने सीएम के बाद दूसरी नंबर पर शपथ ली। तो राजनीतिक पारी में कभी बोल्ड न होने वाले सुखराम परिवार के चिराग अनिल शर्मा मंत्री मंडल में शपथ लेने वाले चौथे विधायक रहे। वहीं लाहौल स्पीति के डॉ. राम लाल मार्कंडेय ने छठे नंबर और कुल्लू के विधायक गोविंद ने दसवें नंबर पर शपथ ली। चारों दिग्गजों को साथ लेकर सीएम राजनीतिक पारी आगे बढ़ाएंगे। हमेशा सियासी चालबाजियों का शिकार मंडी संसदीय क्षेत्र की जनता को अब नई सरकार के साथ विकास के नए आयाम छूने की उम्मीद रहेगी। चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंचे कुछ विधायक मंत्रीपद की रेस में अपनी जगह बनाने में नाकाम ही रहे हैं। भाजपा से घोषित सीएम उम्मीदवार प्रो. प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने के बाद उनके लिए अपनी सीट छोड़ने का एलान करने वाले सरकाघाट के विधायक कर्नल इंद्र सिंह को कैबिनेट में जगह न मिलने का बड़ा कारण बताया जा रहा है। जीत की हैट्रिक लगाने के बावजूद मंत्रीपद की दौड़ से वह बाहर हुए हैं। दूसरी तरफ से सूबे में सबसे अधिक अंतर से जीतने का रिकार्ड बनाने वाले नाचन के युवा विधायक को भी मंत्री की कुर्सी से महरूम रहना पड़ा है। मुख्यमंत्री बनने की दिग्गजों की जोर आजमाइश के बीच प्रो प्रेम कुमार धूमल के समर्थन का एलान करने वाले इस युवा नेता का भी पत्ता कटा है। जबकि कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे कौल सिंह ठाकुर को जीत का सिक्सर लगाने से रोककर हार का मुंह दिखाने वाले द्रंग के विधायक जवाहर भी मंत्री नहीं बन सके हैं। पूर्व आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी को हराने वाले बल्ह विस क्षेत्र के विधायक इंद्र गांधी को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है तो सुंदरनगर में पूर्व सीपीएस सोहन लाल को हराने वाले राकेश जम्वाल भी खाली हाथ रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा के तीनों चेहरे पहली बार चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। ऐसे में अभी इन्हें राजनीतिक कॅरिअर अधिक तराशने की जरूरत है। जबकि करसोग से हीरा लाल ठाकुर का पिछला राजनीतिक कॅरिअर मंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में बाधा माना जा रहा है।
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सीपीएस की कुर्सी पर अब निगाहें
मंत्रिमंडल में जगह न मिलने वाले दिग्गजों की निगाहें अब सीपीएस की कुर्सी पर टिक गई है। हालांकि, सीएम जयराम के राज में यह क्लीयर नहीं हो सका है कि सीपीएस के पद होंगे या नहीं। अगर यद पद सृजित होते हैं तो सरकाघाट से तीसरी बार जीतने वाले विधायक कर्नल इंद्र और दूसरी बार जीते नाचन के विधायक विनोद कुमार सीपीएस की कुर्सी के सशक्त दावेदार हो सकते हैं।

तो निगमों और बोर्डों में जगह बनाने की आजमाइश भी तेज
कैबिनेट बनने के बाद तीन दर्जन के करीब बोर्डों और निगमों में ताजपोशी की कवायद भी तेज हो जाएगी। लाभ के पद में धूमल गुट को शामिल करके जयराम सरकार संतुलन साधने का पूरा प्रयास करेगी। जिन्हें टिकट नहीं मिला है या जिन भाजपा के पदाधिकारियों का कार्य चुनावों में अतिश्रेष्ठ रहा है, उन्हें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद पर बैठाया जा सकता है या उन जिलों को तवज्जो दी जा सकती है, जहां से कोई भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो सका है।
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कैबिनेट रैंक के पद पर भी नजर
प्रदेश में भाजपा को सत्ता की चाबी सौंपने की राह को आसान बनाने वाले विधायकों को कैबिनेट रैंक के पदों को हासिल करने की होड़ भी रहेगी। बीस सूत्रीय कार्यक्रम का अध्यक्ष और वित्तायोग के अध्यक्ष पद पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं। इससे पहले 2007 में दिले राम वित्तायोग के अध्यक्ष रहे हैं। लिहाजा इस बार मंडी जिला को बड़ी जिम्मेदारी की आस है।

एससी कोटे में किसे मिलेगा पद
जिला मंडी में आरक्षी सीटों से जिताऊ कोई भी उम्मीदवार मंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंचा है। आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी को भारी मतों से हराने वाले इंद्र सिंह गांधी के अलावा करसोग से सीपीएस मनसा राम को शिकस्त देने वाले हीरा लाल एससी कोटे में मिलने वाले पद के मंडी जिला से सशक्त दावेदार हो सकते हैं। जिला मंडी में तीन विधानसभा क्षेत्र एससी आरक्षित हैं। जिसमें बल्ह, नाचन और करसोग शामिल हैं।
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