सुंदरनगर (मंडी)। एससी-एसटी एवं ओबीसी बेरोजगार संघ की कार्यकारिणी की बैठक में एसएमसी भर्तियों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। मीटिंग में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि एसएमसी की तरह भर्तियां होती रहीं तो नौकरी से पहले ही 58 साल पार कर बेरोजगार रिटायर्ड हो जाएंगे। इस दौरान स्थायी नौकरियां देने का फैसला पलटने पर भी सरकार को खूब घेरा और वक्ताओं ने इसे युवाओं से कुठाराघात बताया। प्रस्ताव पारित कर प्रदेश में पीटीए, पैरा, पैट और पूर्व में की गई एसएमसी की भर्तियों में रोस्टर के आधार पर इस वर्ग के बैकलॉग को भरने की सरकार से मांग की गई। निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही संघ का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम जयराम ठाकुर से मिल कर उन्हें ज्ञापन सौंपेगा। बैठक प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कुमार की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही एसएमसी की तरह बाहरी भर्तियों के बजाय स्थायी भर्तियां करने की बात कही थी। लेकिन पांच माह के भीतर दोबारा एसएमसी की भर्तियां करने का फैसला लेकर अपनी प्रतिबद्धता से पलट गई है। सरकार के इस फैसले से बेरोजगारों के प्रति उनकी कथनी और करनी का पता चलता है। सरकार की ओर से व्यवस्था से बाहर कभी रिटायर्ड शिक्षकों की भर्ती और अब एसएससी से नियुक्तियां करने की बात कर बेरोजगारों की भावनाओं के साथ छल किया जा रहा है। जिससे एक के बाद एक लिए जा रहे तानाशाही फैसले से प्रदेश में लंबे समय से नौकरी की आस लगाए बैठे हजारों प्रशिक्षित बेरोजगार स्तब्ध है। बैठक में जिला संयोजक हरेंद्र पाल, मीडिया प्रभारी संजीव कुमार, सुरेंद्र कुमार, प्रकाश चंद, अजय कुमार, शीला देवी, सुरेंद्र चौहान और भगत चौहान व संदीप चौहान सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे।
स्कूल-कॉलेज स्तर पर ही छाएगी निराशा
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बेरोजगारों की मांगों को नकार कर शिक्षा विभाग में ऐसी भर्तियों के फैसले से अराजकता का माहौल पैदा हो जाएगा। जिससे प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ स्कूलों-कॉलेजों में पढ़ रहे युवाओं में भी निराशा छाएगी। सरकार यदि शिक्षा विभाग में खाली पदों को भरने के लिए इतनी चिंतित है तो बैचवाइज आधार पर पदों को भरने की न्यायसंगत प्रक्रिया अमल में लाई जा सकती है। जिससे किसी भी वर्ग के बेरोजगारों को आपत्ति नहीं होगी।
सड़कों पर उतरेंगे बेरोजगार
सरकार का इस वर्ग के प्रति यही रवैया रहा तो प्रदेश में एससी-एसटी एवं ओबीसी से संबंधित 40 प्रतिशत आबादी के बेरोजगार अपने संवैधानिक अधिकारों को बचाने के लिए सड़कों पर उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। ऐसी भर्तियों में सरकार का दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में पद भरने का तर्क रहता है, लेकिन बैचवाइज आधार पर शपथपत्र देकर सभी बेरोजगार प्रदेश के किसी भी कोने में नौकरी करने को तैयार हैं। लेकिन, व्यवस्था से बाहर जाकर अपने चहेतों को शामिल करने की अन्याय संगत और असंवैधानिक प्रक्रिया को सहन नहीं किया जाएगा।