धर्मपुर (मंडी)। उपमंडल की टीहरा और चोलथरा पंचायत के बीपीएल मुक्त होने की उपलब्धि विवादों में है। दोनों पंचायतों के लोगों ने एसडीएम धर्मपुर को ज्ञापन सौंपते हुए बीपीएल मुक्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि चंद संपन्न लोगों के कहने पर टीहरा और चोलथरा पंचायतों को बीपीएल मुक्त कर दिया गया है। मामले की जांच की मांग उठाई है। उधर, शिकायतों पर एसडीएम ने सर्वेक्षण टीम को रिकार्ड के साथ तलब किया है। जांच के बाद मामले में आगामी कार्रवाई की बात प्रशासन ने कही है।
बुधवार को सज्याओपिपलू वार्ड के जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह की अगुवाई में टीहरा पंचायत के लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम धर्मपुर एचएस राणा और बीडीओ धर्मपुर गुनजीत सिंह चीमा को बुधवार को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि धर्मपुर क्षेत्र की टीहरा और चोलथरा पंचायत को बीपीएल मुक्त करने का विरोध दर्ज करवाते हुए कहा कि इन पंचायतों को चंद संपन्न लोगों के कहने पर बीपीएल मुक्त कर दिया गया है। जबकि पंचायत में गरीब परिवार हैं। जिनके पास कुछ नहीं है उन्हें छोड़ दिया गया। लोगों ने मांग की कि इन पंचायतों में पुन: बीपीएल सर्वे करवाया जाए और गरीब परिवारों को बीपीएल में लिया जाए। जिप सदस्य भूपेंद्र ने कहा कि 63 लोगों ने पंचायतों को बीपीएल मुक्त करने के खिलाफ हस्ताक्षर करके शिकायत पत्र एसडीएम धर्मपुर एचएस राणा और बीडीओ धर्मपुर गुनजीत सिंह चीमा को सौंपा है।
इन्होंने दर्ज किया विरोध
ज्ञापन सौंपने वालों में निर्मला देवी, सागरो देवी, वीना देवी, प्रवीण कुमार, संतोष कुमार, गुड्डी देवी, पवना देवी, युद्धवीर, सुरेंद्र, दिलीप, रेखा, रघुराम, हरीचंद, बलवीर, तारा देवी, कमला देवी, भाग सिंह, सुंदर, भगती, सुरेश, ज्ञानो देवी, हंसराज, यशपाल, राकेश, शोभा, सुनील कुमार, शीला, संजीव, जयलाल, महेंद्र सिंह, अश्वनी, कल्पना, रेणु, रविंद्र, कल्पना, सीमा, राकेश, पवन, कश्मीर, ब्रम्ही देवी, विद्यासागर, कमलदीप, रजनीश, सोहन सिंह, अनिल, प्रेमसिंह, रतन चंद, राजकुमार, संध्या देवी, बांकाराम, राकेश, इंद्र पाल सहित कई लोग शामिल रहे और इन्होंने विरोध दर्ज किया है।
सर्वेक्षण टीम को रिकार्ड समेत किया तलब : एसडीएम
एसडीएम धर्मपुर एचएस राणा ने इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए 3 मई को पंचायत प्रधान, सचिव और सर्वेक्षण टीम को रिकार्ड सहित जांच के लिए बुलाया है। इसके साथ ही उन्होंने बीडीओ धर्मपुर को आदेश जारी किए कि पंचायत में जाकर मामले की जांच करें।