जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल के एक निजी स्कूल में स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के मनमाने दाम वसूलने का मामला सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने एक छात्रा से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने के लिए 100 रुपये वसूले और बस फेयर की रसीद थमा दी। वहीं, शिक्षा विभाग का दावा है कि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के स्कूल महज स्टेशनरी चार्ज ही वसूल सकता है। जबकि, निजी स्कूल प्रबंधन का दावा है कि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी करने का उनका अपना तय शुल्क है। हर शैक्षणिक संस्था का यह शुल्क अलग हो सकता है।
छात्रा की अभिभावक तनुजा ने कहा कि उनकी लड़की क्षेत्र के निजी स्कूल में पढ़ती थी। लेकिन, जब वह अपनी लड़की का स्कूल त्याग प्रमाण पत्र लेने गई तो उनसे स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी करने के 100 रुपये मांगें गए। हालांकि, उन्होंने इस बात का एतराज भी जताया कि सरकारी स्कूलों में स्कूल त्याग प्रमाण पत्र के स्टेशनरी चार्ज के तौर पर मात्र पांच या दस रुपये लिए जाते हैं। लेकिन, स्कूल के प्रधानाचार्य ने उनकी बात को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों के अपने-अपने शुल्क हैं। उन्होंने कहा कि उनसे 100 रुपये लेने के बाद ही यह प्रमाण पत्र दिया गया तो उनके हाथ बस फेयर की रसीद बुक से 100 रुपये की रसीद काट कर थमा दी गई। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत बोर्ड से जानकारी एकत्रित करके न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उन्होंने बोर्ड से मांग की है कि सभी निजी स्कूलों को आदेश जारी किए जाएं कि सभी प्रकार के शुल्क सूचना पट्ट में अंकित किए जाएं।
स्टेशनरी चार्ज से अधिक नहीं वसूल सकते स्कूल : विभाग
उच्च शिक्षा विभाग मंडी के उपनिदेशक अशोक शर्मा ने कहा कि विद्यालय त्याग प्रमाण पत्र के लिए स्टेशनरी चार्ज के तौर पर पांच या दस रुपये ही वसूले जाने चाहिए। इससे ज्यादा नहीं लिए जा सकते।