मंडी। जिला न्यायाधीश के न्यायालय ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत दायर करीब 100 याचिकाओं को खारिज करने के फैसले सुनाए हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा राजमार्ग के निर्माण के प्रभावितों ने मध्यस्थ मंडलायुक्त के अवार्डों को जिला न्यायालय में याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी थी। एनएचएआई की ओर से चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-मंडी फोरलेन का कार्य जारी है। निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण किए जाने से जिला बिलासपुर, मंडी और कुल्लू के हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। जिला न्यायालय और मध्यस्थ न्यायालय में इस समय भूअधिग्रहण के अवार्ड से संबंधित सैकड़ों याचिकाएं लंबित हैं। इनमें से अनेक मामलों का निस्तारण भी हो चुका है।
जिला न्यायालय में राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर से मंडी जिला की औट तहसील, मंडी शहर, बल्ह तहसील, सुंदरनगर तहसील, कोटली तहसील के लोगों की दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इसके अलावा बिलासपुर और कुल्लू जिले के प्रभावितों की ओर से दायर याचिकों को भी खारिज किया है।
जिला न्यायाधीश ने याचिकाओं के फैसले में कहा कि तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ है कि अवार्ड को किसी धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार करके या भारतीय कानून के किसी मूल नीति और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना करके पास किया गया है। याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि मध्यस्थ के अवार्ड किस तरह पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। ऐसे में अदालत ने अवार्ड को बरकरार रखते हुए याचिकाओं को निरस्त करने के फैसले सुनाए हैं।