थुनाग (मंडी)। सराज की लंबाथाच पंचायत के थुनाड़ी गांव पर प्रकृति का कहर टूटा है। बादल फटने और भूस्खलन से इस छोटे से गांव के लोगों की जिंदगी उजाड़ गई। पांच मकान और पांच गोशालाएं मलबे में तब्दील हो गईं जबकि दो दर्जन से अधिक मकान मौत के मुंह में लटके हैं। ऊपर से चैल-जंजैहली सड़क से गिरता मलबा और नीचे बाखली खड्ड के उफनते पानी से गांव पर दोहरी तलवार लटक रही है। राहकोट नाले का बहाव अब गांव की ओर मुड़ गया है। जरा सी बारिश से मलबा घरों में घुस रहा है और जमीन का कटाव हर पल इन बेसहारा लोगों की जिंदगी छीनने को आतुर है।
36 दिनों से थुनाड़ी के 23 परिवारों के करीब 100 लोग प्राइमरी स्कूल के दो छोटे से कमरों में जीवन बिता रहे हैं। इनमें तेगू राम, वीणू राम, केवल राम, देवेंद्र कुमार, प्रदीप, वेद राम, कुलवंत, कमल देव, मोहर सिंह, तुलसी राम, नंद लाल, राधा देवी, मंघरी देवी, सरला देवी, परस राम, टेक चंद जैसे लोग शामिल हैं, जिनकी आंखों में आंसुओं के साथ उम्मीद की एक किरण भी झिलमिला रही है। इनमें से एक दर्जन से ज्यादा मासूम बच्चे यहीं से स्कूल जाते हैं जहां दिनभर उनकी मासूमियत इस दर्दनाक मंजर से जूझती है।
स्कूल के दो कमरों में बने राहत शिविर में इन लोगों की जिंदगी थम सी गई है। बारिश की बूंदें हर पल उनके घावों पर नमक छिड़क रही हैं और घर लौटने की उम्मीद धुंधली होती जा रही है। सामुदायिक रसोई में बना खाना इनके लिए एकमात्र सहारा है। राहत सामग्री तो मिल रही है लेकिन भविष्य की अनिश्चितता इनके सीने पर पहाड़-सा बोझ डाले है। कुछ लोग मजबूरी में रिश्तेदारों के पास चले गए पर ज्यादातर यहीं डटे हैं, उम्मीद लिए कि शायद बरसात रुक जाए और वे अपने घरों को देख सकें।
ग्रामीणों की एक ही पुकार है, बरसात खत्म होने तक इंतजार करेंगे लेकिन अगर सरकार पुनर्वास का सौ फीसदी आश्वासन दे तो ही दूसरी जगह जाएंगे। उनकी आंखों में डर और उम्मीद का मेल है। उधर, एसडीएम रमेश कुमार ने बताया कि थुनाड़ी के ग्रामीणों के पुनर्वास का मामला सरकार को भेज दिया गया है।