नामांश ताया-तायी का भी लाडला था। उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। भतीजे की पार्थिव देह के इंतजार में दोनों की आंखें पथरा गई हैं। स्कूल शिक्षक उनकी बहन प्रिया भी दुखद समाचार को सुनकर बेहद टूट चुकी हैं। ताया जोगिंद्र स्याल ने कहा कि उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे। बता दें कि नामांश स्याल के घर में अभी कोई नहीं रहता है। उनके ताया-तायी जोगिंद्र स्याल और मधु बाला धर्मशाला के पास सिद्धबाड़ी में रहते हैं जो निधन की खबर के बाद पैतृक गांव पहुंच गए हैं। घर में सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। माहौल गमगीन है।
पटियालकर के एक गांव वाले प्रताप चंद कहते हैं कि नामांश की दुबई में जान चली गई, और हम सब उसे श्रद्धांजलि देने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं। उसके पिता आर्मी में थे, और उसकी मां हाउसवाइफ हैं। उसकी पत्नी भी इंडियन एयर फोर्स में विंग कमांडर हैं। सभी गांव वाले नामांश को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं।
बहुत ही ईमानदार और सीधा-सादा लड़का था- मदन लाल
विंग कमांडर नामांश स्याल के चाचा मदन लाल ने कहा कि उनका पार्थिव शरीर आज यहां आने वाला है। सभी गांव वाले यहां इंतजार कर रहे हैं। हमारे कुछ रिश्तेदार भी आए हैं। उनका अंतिम संस्कार आज ही किया जाएगा। यह देश के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। वह बहुत ही ईमानदार और सीधा-सादा लड़का था।