जज्बे को सलाम, लाहौल घाटी में कई किमी पैदल चलकर बहाल कर रहे आपूर्ति
तीन से चार फीट बर्फ और 15 फीट ग्लेशियर के बीच बखूबी निभा रहे अपनी ड्यूटी
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। घाटी में तीन से चार फीट बर्फ और 15 फीट ग्लेशियर के बीच जलशक्ति विभाग के कर्मचारी पैदल आठ किलोमीटर चलकर अति दुर्गम गांवों में पानी की सप्लाई बहाल कर रहे हैं।
बुलंद हौसले के साथ ये कर्मचारी हिमखंड गिरने के खतरे, ठंड की काट और कठिन रास्तों के बीच अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे हैं। लाहौल घाटी में बर्फबारी के बीच पेयजल और बिजली की आपूर्ति बहाल रखने के लिए बिजली बोर्ड और जलशक्ति विभाग के कर्मचारी खूब पसीना बहा रहे हैं।
उदयपुर उपमंडल में भी जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों ने शकोली, हिंसा और भुजुंड में तीन से चार फीट बर्फ के बीच कई किलोमीटर पैदल चलकर पेयजल आपूर्ति बहाल की। घाटी के अति दुर्गम गांव भुजुंड में जलशक्ति विभाग के कर्मचारी बेली राम, छतर सिंह, ऋषि कुमार, कपिल देव, विश्वनाथ और सतीश ने रविवार को करीब तीन फीट बर्फ में आठ किलोमीटर पैदल चलकर और 15 फीट ग्लेशियर को काटकर पेयजल आपूर्ति सुचारू की। शकोली और हिंसा क्षेत्र में भी सुनील और साथियों ने सतधारा की ओर चार फीट बर्फ में पांच किमी की चढ़ाई चढ़कर पेयजल लाइनों को दुरुस्त कर लोगों को राहत पहुंचाई।
चुनौती से कम नहीं पेयजल सुचारू रखना
बर्फ के बीच पेयजल लाइनों के मुहाने तक जान जोखिम में डालकर पहुंचना और लोगों के लिए पेयजल आपूर्ति बहाल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। जगह-जगह हिमखंड गिरने का खतरा है। बावजूद इसके कर्मचारियों के जनसेवा के इस जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। संवाद
जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों ने शकोली, हिंसा, तिंदी और भुजुंड आदि गांवों में पेयजल योजनाओं को बहाल करने का काम किया है। विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी निरंतर प्रतिबद्ध है। - अनुराधा राणा, विधायक लाहौल-स्पीति
घाटी में बर्फ के बीच पेयजल योजनाओं को बहाल करना विभाग के कर्मचारियों के लिए चुनौती रहता है। इन दिनों विभाग के कर्मचारी जोरों पर काम में लगे हैं। - अजय गुप्ता, अधिशासी अभियंता, जलशक्ति विभाग