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Kullu News: लाहौल में सेब के बगीचों में वूली एफिड का प्रकोप

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बगीचों में पत्ते झड़ते ही शाखाएं दिखने लगीं सफेद, बागवान परेशान
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दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल में सेब तुड़ान के बाद पत्ते झड़ते ही पौधों में अब वूली एफिड का प्रकोप शुरू हो गया है, इस कारण बागवान परेशान हैं। जिले के केलांग, जाहलमा, उदयपुर, शांशा, त्रिलोकनाथ, कुकुमसेरी सहित कई गांवों में बगीचों में सेब तुड़ान के बाद सेब की शाखाएं सफेद दिखने लगी हैं।
पिछले तीन-चार वर्षों से घाटी के बगीचों में वूली एफिड की शिकायत देखने को मिल रही है। बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो वूली एफिड में ये कीड़े एक सफेद रोएंदार आवरण से ढके होते हैं जो ऊन या कपास जैसा दिखता है। यह पौधों का रस चूसकर उसे कमजोर कर देता है और इससे पौधे का विकास रुक जाता है।
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वूली एफिड से उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस बीमारी में पौधों में गांठें भी बनती है। सर्दियों में यह कीट जड़ों में पहुंच जाता है। बागवानों ने मांग की है कि विभाग लाहौल में इस बीमारी की रोकथाम के लिए जगह-जगह जागरूकता शिविर लगाए।
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बागवानी विभाग के विशेषज्ञों ने दी दवा के छिड़काव की सलाह
वूली एफिड से बचाव के लिए पौधों के तने में लगभग 30 सैंटीमीटर चौड़ा सिट्की बैंड लगाएं, जिससे कीट नीचे उतरते हुए उसमें चिपक जाए। इसके लिए बागवान क्लोरोपायरिफोस, डरमेट, फोर्स, मासवान 200 मिलीलीटर प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अगर वूली एफिड का प्रकोप ज्यादा हो तो इस दवा को मिट्टी में 400 मिली प्रति 200 लीटर पानी के हिसाब से पौधों के तौलिये में मिला सकते हैं। इसके अलावा बागवान प्राकृतिक उपाय में नीम या असली का तेल तीन से चार प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
-डाॅ रमेश राणा, बागवानी विशेषज्ञ,
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