स्पीति घाटी के महिला मंडल से जुड़ी महिलाएं परंपरागत वस्तुओं को प्रदर्शित करती हुई। संवाद
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र की स्पीति घाटी के पांच महिला मंडल एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ जैव-विविधता संरक्षण में अपना योगदान देंगी। महिला मंडल एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने एलान किया है कि उनके मुनाफे का जो पांच प्रतिशत हिस्सा होगा, वह जैव संरक्षण गतिविधियों के लिए समर्पित किया जाएगा। यह राशि क्षेत्र में याक संरक्षण, स्थानीय कृषि फसलों और पारंपरिक जैव-विविधता के संरक्षण पर खर्च की जाएगी। स्पीति घाटी में पर्यटन आधारित स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में पीपल फाउंडेशन ने महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन संबंधी प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाएं स्थानीय परंपरागत उत्पादों को बेचकर आत्मनिर्भर बन सकें।
इन महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों में देश के सबसे ऊंचे गांव में शुमार किब्बर, कोमिक, लंग्जा, हिक्किम और रंगरिक गांव की महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं को काम करने के लिए उत्पाद प्रदर्शनी और विपणन गतिविधियों के लिए मार्केटिंग टेबल उपलब्ध कराए गए। इससे वे अपने उत्पादों को पर्यटकों और खरीदारों के सामने बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
महिला एवं स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधि महिलाओं देकिद, केसंग, डोल्मा, पलकित, हीशे, डोलकर ने कहा कि उन्हें इस मंच के माध्यम से जो लाभ मिलेगा, उसका पांच प्रतिशत हिस्सा जैव-विविधता संरक्षण पर खर्च किया जाएगा।
पीपल फाउंडेशन के स्पीति प्रभारी इंजीनियर अभिषेक कहते हैं कि यह मॉडल आजीविका विकास, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ता है। समुदाय आधारित उद्यम विकास के साथ संरक्षण के लिए वित्तीय योगदान सुनिश्चित करने वाली यह पहल स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।