प्राकृतिक खेती के लिए अनुदान दे रही सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। फल, सब्जियों एवं खाद्यान्न में रसायनों के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए कुल्लू की कृषक महिलाएं प्राकृतिक कृषि की तकनीक अपना रही हैं। इन महिलाओं ने प्राकृतिक कृषि अपना कर जहर मुक्त खेती-बागवानी की तरफ कदम बढ़ाया है। बाजार में बढ़ती मांग को पूरा कर अच्छी आमदनी भी कमा रही हैं।
ग्राम पंचायत हॉट की महिला कृषक मीरा देवी ने कहा कि वह दो साल से प्राकृतिक खेती कर रही हैं। पिछले वर्ष इसका प्रशिक्षण लिया था। विभाग की सहायता से देसी गाय भी खरीदी है। इसके गोबर और गोमूत्र से वह स्वयं ही जीवामृत, वीजामृत इत्यादि बनाती हैं और इनका प्रयोग करती हैं। कृषक महिला बबली ने ढाई बीघा में अनार की खेती प्राकृतिक रूप से शुरू की है। इसमें रसायनों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। बाजार जाने वाले प्राकृतिक उत्पाद अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
खोखन गांव की महिला कृषक हीरामणि ने कहा कि वह पांच बीघा भूमि में 2018 से प्राकृतिक कृषि कर रही हैं। इसके बेहतर परिणाम आए हैं। उन्होंने कहा कि रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती आज के युग की आवश्यकता है। आत्मा परियोजना की डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर डाॅ. बिंदु शर्मा का कहना है कि किसान सभी घटकों जीवामृत, घन जीवामृत, ब्रह्मास्त्र इत्यादि का प्रयोग प्राकृतिक रूप से कृषि करने के लिए कर रहे हैं। सरकार उन्हें अनुदान भी दे रही है। संवाद