देवभूमि कुल्लू में पिछले एक माह से ओलावृष्टि का दौर जारी है। इससे कृषि और बागवानी पर लगातार बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बची फसलों को बचाने के लिए जिला के लोगों ने देवी-देवताओं की शरण में जाना आरंभ कर दिया है। रैला गांवों के सैकड़ों हारियानों ने भी शनिवार को बीठ पर्व के मौके पर भाटकंडा नामक पर्वत पर पहुंचकर साठ देव कन्याओं से ओलावृष्टि को रोकने की कामना की।
बीठ पर्व की बेला पर रैला गांव के आराध्य देवता लक्ष्मी नारायण भी सैकड़ों हारियानों के साथ भाटकंडा में पहुंचे। इस दौरान जोगणियों की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद देव कन्याओं (जोगणियों) को खिचड़ी का भोग भेंट स्वरूप चढ़ाया गया।
देवता लक्ष्मी नारायण ने किया देव कन्याओं से मिलन
कारकूनों के मुताबिक बीठ पर्व की मान्यता पर्वत में जाकर साठ देव कन्याओं का पूजन करना है। मान्यता अनुसार साठ देव कन्याएं ही ओलावृष्टि को रोक पाती हैं। ऐसे में आराध्य देवी-देवता भी साठ कन्याओं की मन्नतें पूरी करने के साथ पर्वत शृंखलाओं में विराजमान साठ देव कन्याओं से मिलन करने जाते हैं। शनिवार को देवता लक्ष्मी नारायण ने भी इस हारियानों संग भाटकंडा पहुंचकर देव कन्याओं से मिलन किया। इसके बाद देवता अपने देवालय लौटे और बीठ पर्व में भाग लिया।
हारियानों ने सामूहिक नाटी में लिया भाग
देवता के कारदार जगरनाथ ने बताया कि बैशाख मास के 11 प्रवीष्ठे को प्रतिवर्ष सभी हारियानों ने निराहार व्रत रखकर बीठ पर्व में देव आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं, जोगणियों से ओलावृष्टि रोकने और सुख शांति की कामना की गई। इस अवसर पर देवता के गूर तमेश्वर शर्मा, पुजारी कृष्णदेव शर्मा, जुगत राम धामी, पालसरा यान सिंह नेगी, नारायण सिंह, सुखदयाल व रमेश धामी सहित दूरदराज से आए हारियानों ने देव परंपरा के अनुसार सामूहिक नाटी में भाग लिया।