जनवरी का आधा महीना बीतने के बाद भी नर्सरियों में नहीं बिका आधा स्टॉक
पौधों की ब्रिकी कम होने से नर्सरी संचालक मायूस, बारिश के इंतजार में बागवान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में इस बार जनवरी का महीना बागवानी के लिए उम्मीद नहीं, इंतजार बनकर रह गया है। आमतौर पर इस समय तक नर्सरियों से आधा से ज्यादा पौधों का स्टॉक बागवानों के खेतों तक पहुंच जाता है लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं।
बीते चार महीनों से बारिश और बर्फबारी न होने से जमीन में नमी नहीं है। इससे बागवान न तो गड्ढे तैयार कर पा रहे हैं और न ही नए पौधे लगा रहे हैं। इसका सीधा असर नर्सरियों पर पड़ा है जहां सेब, प्लम और जापानी फलों के लाखों पौधे बिक्री के इंतजार में खड़े हैं। मौसम की बेरुखी ने न सिर्फ बागवानों की योजनाओं पर ब्रेक लगाया है, बल्कि नर्सरी संचालकों की चिंता भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।सूखे जैसे हालात के चलते पौधों का कारोबार मंदा पड़ा है। ऐसे में नर्सरी संचालक मायूस हैं। नर्सरी संचालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बागवान सेब, प्लम, जापानी फल आदि फलों के पौधे लगाने के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। जिला कुल्लू की नर्सरियों में सेब, प्लम आदि के लाखों पौधे खड़े हैं। नर्सरी संचालक की मानें तो 15 जनवरी तक 50 फीसदी तक स्टॉक समाप्त हो जाता था। इस बार इसमें कमी आई है। अगर जनवरी के अंतिम पखवाड़े में भी बारिश नहीं होती है तो नर्सरी लगाने वालों को घाटा उठाना पड़ेगा। बहरहाल, नर्सरी संचालक अब बारिश के इंतजार में हैं। बारिश के बाद सेब पौधों की ब्रिकी में तेजी आएगी। बागवान सेब, प्लम, जापानी फल आदि के पौधे खरीदेंगे। उधर, इस संबंध में फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि बारिश और बर्फबारी न होने से बागवान चिंतित हैं। बागवान अपने बगीचों में अन्य कार्य समय पर निपटाएं।