कुल्लू में बारिश न होने से रुकी 60 फीसदी बिजाई, मुरझाने लगी बीजी गई 40 फीसदी फसल
सूखे जैसे हालात ने बढ़ाई एक लाख किसानों की चिंता, खरीफ के बाद रबी पर मंडराया खतरा
देवी-देवताओं के दरबार में पहुंचकर बारिश की याचना कर रहे किसान, चेहरों पर चिंता की लकीरें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बारिश से सूनी पड़ी धरती अब जिले के किसानों का मन भी सुखाने लगी है। रबी सीजन की 19 हजार हेक्टेयर भूमि पर बोई जाने वाली गेहूं, जौ, मटर और लहसुन की फसल इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रही है।
बारिश के इंतजार में 60 फीसदी बिजाई ठप पड़ी है जबकि 40 फीसदी फसल नमी के अभाव में मुरझाने लगी है। खेतों में दरारें खुल रही हैं और किसान मंदिरों-देवालयों तक पहुंचकर राहत की याचना कर रहे हैं। खरीफ में नुकसान झेल चुके लगभग एक लाख किसानों के लिए यह सूखा अब दोहरी मार बन चुका है।
कुल्लू जिले में 14 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई होती है। इसके अलावा 1600 हेक्टेयर जमीन पर जौ, 1500 हेक्टेयर में मटर और 1500 हेक्टेयर में लहसुन की फसल उगाई जाती है। सूखे जैसे हालत का नुकसान पूरे हिमाचल में दिख रहा है मगर कुल्लू जिले के ढलानदार खेतों मेंं सिंचाई की सुविधा न होने से करीब एक लाख किसानों की चिंता बढ़ गई है।
आधा दिसंबर बीता, न बर्फ गिरी और न ही बरसे मेघ
किसान टेक सिंह, अशोक ठाकुर, मनोहर लाल, गीता नंद, प्रेम सिंह, सुनील कुमार ने कहा कि दिसंबर का माह आधा बीत गया है। न बर्फबारी हो रही है और न ही बारिश। देवी-देवता भी धरती पर हो रहे अनिष्ट से बारिश की संभावनाओं से मना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेत-खलिहानों में नमी न होने से कई किसान गेहूं, मटर और जौ की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। जिन किसानों ने आनन फानन में बिजाई की है, वह भी अब मुरझाने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि बरसात में खरीफ की फसल बर्बाद हो गई और अब सूखे के कारण रबी पर संकट छाने लगा है। लोगों ने बीज लेकर रखा है लेकिन जमीन में नमी नहीं होने से बिजाई नहीं कर पा रहे हैं।
खेतों में जिन किसानों ने गेहूं, जौ, मटर और लहसुन की बिजाई की है, वह अब सूखे जैसे हालत से मुरझाने लगी है। किसानों को अब खरीफ के बाद रबी की फसल के नुकसान की चिंता सताने लगी है। -अशोक ठाकुर, किसान
सूखे जैसे हालत से खेतों में भी दरारें पड़ने लगी हैं। किसान रबी की बिजाई के लिए परेशान हैं। सब बारिश के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। सरकार को नुकसान का आकलन करना चाहिए। - टेक सिंह, किसान