जिले में कुल्लवी टोपियों की जगह पावरलूम की टोपियों को तरजीह दी जा रही है। ऐसे में जिले के कई बुनकरों का रोजगार भी प्रभावित हो रहा है। यही नहीं, पावरलूम की टोपियों को तवज्जो देने में पर्यटन विभाग भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। इससे साफ है कि स्वयं पर्यटन विभाग देवभूमि की संस्कृति को संजोने में कितनी दिलचस्पी ले रहा है। हैरत है कि कुल्लू-मनाली में विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर यहां देश-विदेश से पहुंचे सैलानियों का स्वागत पारंपरिक कुल्लवी टोपी की जगह पावरलूम की टोपी पहनाकर किया गया।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने पावरलूम की टोपियों और मफलरों पर पाबंदी लगाने की बात भी कही है। इसके बावजूद पावरलूम से बनी टोपियां प्रदेश नहीं कुल्लवी टोपियों के लिए विख्यात जिला कुल्लू में भी धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। मशहूर कुल्लवी टोपी की कीमत ढाई सौ रुपये से शुरू है। इस टोपी को बनाने के लिए काफी समय लगता है। जबकि पावरलूम टोपी मशीन में जल्दी तैयार होती है। थोक में पावरलूम की टोपी 30 से 40 रुपये में बिकती है। इसी टोपी को कुल्लू-मनाली की वादियों में 200 से लेकर 300 रुपये में बेचा जा रहा है। लेकिन, मशहूर कुल्लवी टोपी की साख कमजोर होती जा रही है। उधर, इस संदर्भ में जिला पर्यटन अधिकारी रतन गौतम का कहना है कि गत दिवस मनाली में विभाग की ओर से मनाए गए विश्व पर्यटन दिवस पर सैलानियों को दी टोपियां होटल एसोसिएशन की ओर से दी गई थीं। पावरलूम टोपी के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसा है तो आगामी बार विभाग की ओर से पूरा ध्यान रखा जाएगा।