कुल्लू (वि)। बच्चों की सीखने की क्षमता और रुचि को ध्यान में रखकर पढ़ाने से प्रारंभिक शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से विबग्योर वर्ल्ड स्कूल कुल्लू में शनिवार को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के फाउंडेशनल स्टेज विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें कुल्लू घाटी के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों को बाल-केंद्रित शिक्षा और खेल व गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के तरीके बताए गए।
कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन कल्पना राणा और विवेक शर्मा ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों को खेल और गतिविधियों के माध्यम से सिखाना अधिक प्रभावी रहता है। शिक्षण योजना बनाते समय बच्चों की उम्र, रुचि और सीखने की क्षमता के साथ उनके शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास को ध्यान में रखना जरूरी है।
कार्यशाला में शिक्षकों ने शिक्षण प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों, नए शैक्षिक दृष्टिकोणों और प्रभावी शिक्षण तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। साथ ही पढ़ाई को बच्चों के लिए सरल, सहज और रुचिकर बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई।
स्कूल के प्रधानाचार्य कुशल पराशर ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण और कौशल विकास आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराने और कक्षा में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने में सहायक होती हैं। संवाद