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वसंत उत्सव से कुल्लू में होली का आगाज

Fri, 12 Feb 2016 10:02 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, कुल्लू
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बसंत उत्सव के साथ ही कुल्लू में होली का आगाज हो गया। बसंत पंचमी उत्सव के मौके पर भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा के साथ हजारों लोग पहुंचे थे। अपनी तरह के इस परंपरागत उत्सव का निर्वहन केवल कुल्लू में ही होता है। कुल्लू के बैरागी समुदाय अब 24 मार्च तक यूं ही रंगों से खेलते रहेंगे।
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महंतों की टोली हर रोज भगवान रघुनाथ के दरबार में होली के गीत गुनगुनाएंगे। शुक्रवार को बसंत उत्सव के साथ ही बैरागियों ने अपनी डफली की थाप और घंटियों की धुन से कुल्लू की आबोहवा में मिठास भर दी। रथ यात्रा की आगाज के साथ ही कुल्लू गुलाल से सराबोर हो उठा। इस दौरान राम-भरत मिलाप का आयोजन किया गया।

कुल्लू के राजघराने में राजा जगतसिंह का शासनकाल वर्ष 1637 से 1662 तक रहा। इस दौरान अयोध्या से भगवान राम की मूर्ति कोढ़ से मुक्ति पाने के लिए यहां लाई गई। इसी के साथ कुल्लू में वैष्णों पर्व मनाने की रीत शुरू हुई। आज भी जिन स्थानों में भगवान रघुनाथ की मूर्ति है वहां बैरागी समुदाय के लोगों की विशेष भूमिका रहती है। होली के गीत गाना शुरू कर देते हैं। कुल्लू के साथ साथ मणिकर्ण, हरिपुर व नग्गर में भी बसंत पंचमी का आयोजन किया गया।
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ऐसी मान्यता है कि रंग चढ़ते ही मन्नतें पूरी होती है। रथ यात्रा के शुरू होने से पूर्व हनुमान अपने केसरी रंग के साथ लोगों के बीच जाता है। लोगों का केसरी नंदन के साथ स्पर्श हो इसके लिए लोग उसके पीछे भागते हैं। मान्यता है कि जिन लोगों को हनुमान का केसरी रंग लगता है उसकी मन्नतें पूरी मानी जाती है। इस दिन अधिकतर स्त्रियां पीले व सफेद वस्त्र पहनकर आती है। केसरी नंदन की कृपा दृष्टि लोगों के ऊपर पड़े इसलिए उसके आगे आने के लिए लोगों का कुनबा लालायित रहता हैं। रथ यात्रा में अधिष्ठाता रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह समेत राजपरिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे।
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